नदी बनी जोखिम का रास्ता
पुल अधूरा होने की वजह से ग्रामीणों को हर दिन नदी पार करने के लिए छोटी नावों या तैरकर जान हथेली पर रखनी पड़ती है। बरसात के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है, जब जलस्तर तेजी से बढ़कर खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है।
अधिकारियों को दी गई सूचना, अब तक कोई कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से अधिकारी व जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन और शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन सरकारी मशीनरी की लापरवाही के चलते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पुल अधूरा छोड़ देने से ना सिर्फ परिवहन बाधित हुआ है, बल्कि आपात स्थिति में इलाज, स्कूल, बाजार जैसी बुनियादी जरूरतें भी प्रभावित हो रही हैं।
जनता की मांग: अधूरे पुलों का हो निर्माण
ग्रामीणों की मांग है कि सरकार इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता के आधार पर ले और जल्द से जल्द पुल का निर्माण कार्य पूरा कराया जाए। यह न सिर्फ जनता की सुरक्षा का मामला है, बल्कि क्षेत्रीय विकास और कनेक्टिविटी के लिए भी जरूरी है।