निगरानी ने शिक्षा विभाग से मांगी फाइल:निगरानी ब्यूरो ने शिक्षा विभाग से इन शिक्षकों के मैट्रिक, इंटर, स्नातक और प्रशिक्षण से संबंधित प्रमाण पत्रों की फाइलें तलब की है. विभाग ने इनकी सत्यापित फोटोकॉपी निगरानी को सौंप दी है. संभावना है कि अगले सप्ताह तक जांच प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी. इसके बाद संबंधित थाना में इन शिक्षकों के विरुद्ध केस दर्ज किया जाएगा.
प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी:सूत्रों के अनुसार अब तक की जांच में तीन से चार शिक्षकों के प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी साबित हो चुके हैं. उनके खिलाफ कभी भी केस दर्ज किया जा सकता है. फिलहाल इनके नाम गुप्त रखे गए हैं ताकि वे फरार न हो जाएं और पुलिस जांच में बाधा न उत्पन्न हो.
“निगरानी ब्यूरो लगातार संदिग्ध शिक्षकों की जांच कर रही है. वर्ष 2014 से अब तक बांका जिले में कुल 170 फर्जी शिक्षकों पर केस दर्ज किया जा चुका है. पिछले वर्ष कटोरिया में पांच फर्जी शिक्षक पकड़े गए थे जिनमें एक महिला शिक्षिका भी शामिल थी.”-संजय कुमार यादव, डीपीओ स्थापना
फरार हैं कई आरोपी:जिले के शंभुगंज, बांका, धोरैया, चांदन और बेलहर थाना क्षेत्रों में भी फर्जी शिक्षकों के विरुद्ध केस दर्ज हुए हैं. इनमें से कई शिक्षक अभी भी फरार हैं. शिक्षा विभाग ने इनकी सेवा समाप्त कर दी है. इस वर्ष भले ही निगरानी की कार्रवाई धीमी रही हो लेकिन अब तक डेढ़ दर्जन फर्जी शिक्षक पकड़े जा चुके हैं जो सक्षमता परीक्षा देने पहुंचे थे.
शिक्षकों में हड़कंप: निगरानी की इस कार्रवाई से फर्जी शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है. आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना है. निगरानी ब्यूरो की सख्ती से अब शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की उम्मीद बढ़ गई है.





