Tuesday, April 21, 2026
Homeमिथिला और मगध संस्कृति को एक करने के लिए निकाली 70 किमी...

मिथिला और मगध संस्कृति को एक करने के लिए निकाली 70 किमी लंबी यात्रा, आठ साल से हो रहा आयोजन।

- Advertisement -

इस दौरान जय मां जयमंगला, जय भगवान परशुराम, जय श्रीराम और जय हनुमान के नारों से संपूर्ण वातावरण गुंजयमान होता रहा। यात्रा में जयमंगला वाहिनी के दर्जनों कार्यकर्ताओं के साथ सैंकड़ों सनातनियों ने इस धर्म यात्रा में भाग लिया। यह यात्रा बीते कई साल से निकाली जा रही है। इस अवसर पर जयमंगला वाहिनी से जुड़े हुए शुभम कुमार, जेपी कुमार, सिंह मालिक, सोनू कुमार, गोपाल झा, सुंदरम वत्स, भानु कुमार आदि लोगों ने कहा कि यह आठवां साल यात्रा का है। हम लोगों को धर्म जागरण के लिए काम करने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ है, इससे हम लोग अपने आप को सौभाग्यशाली मानते है ।

- Advertisement -

बिहार के अंदर सबसे लंबी धाम यात्रा है, जो बेगूसराय के जयमंगलागढ़ से पटना के मोकामा परशुराम मंदिर तक जाती है। रास्ते में सभी सनातनियों का भरपूर समर्थन और सहयोग प्राप्त होता रहता है। इस अवसर पर जदयू नेता संजय सिंह, आरसीएस कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अमृतांशु कुमार, कोषाध्यक्ष सत्यम कुमार, रोहित कुमार, अभिषेक सिंह, भाजपा नेता शालिग्राम सिंह, जयप्रकाश सहित काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।

- Advertisement -

यात्रा जयमंगलागढ़ से पूजा कर प्रारंभ हुई। यह मंझौल, राजौरा, मोहनपुर, पन्हास, हर हर महादेव चौक, जीरोमाइल, बीहट बड़ी दुर्गा मंदिर, सिमरिया, हाथीदह होते हुए मोकामा के बाबा परशुराम मंदिर पहुंच कर संपन्न हुई। संयोजक अवनीश कुमार उर्फ सिंह मालिक और शिवम ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य मिथिला और मगध की संस्कृति को जोड़ना है। उन्होंने बाबा परशुराम का आशीर्वाद लेकर राष्ट्र के विकास की कामना की।

 

वहीं, अमन और सोनू कुमार ने बताया कि भगवान परशुराम की जयंती हर वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। उन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। उनका जन्म ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र के रूप में हुआ था। परशुराम का जन्म न्याय और धर्म की रक्षा के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। भक्तगण उनसे शक्ति, साहस और बुराई से सुरक्षा का आशीर्वाद मांगते हैं।

- Advertisement -
RELATED ARTICLES

Most Popular