मधुबनी शहर का एकमात्र स्टेडियम आज बदहाल स्थिति में है। बता दें कि 1983 में बना यह स्टेडियम कभी जिले की शान हुआ करता था। अब यह जलजमाव और झाड़-झंखाड़ से घिरा है। मामूली बारिश में ही स्टेडियम तालाब में बदल जाता है। स्टेडियम का ढांचा जर्जर हो चुका है। आसपास के घरों का गंदा पानी यहां जमा होता है।नगर निकाय चुनाव में भी उठा था मुद्दा
स्थानीय निवासी सुफियान अंसारी ने बताया कि मधुबनी और झंझारपुर दो लोकसभा क्षेत्रों में बंटा है। झंझारपुर में मिथिलाहाट जैसी योजनाएं चल रही हैं। लेकिन मधुबनी मुख्यालय विकास से वंचित है।
भवन निर्माण निगम लिमिटेड ने 2022 में स्टेडियम के लिए 20 करोड़ रुपए का प्राक्कलन तैयार किया था। लेकिन अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुआ है। नगर निकाय चुनाव में यह मुद्दा उठा। चुनाव के बाद स्थिति जैसी थी वैसी ही हैं ।
स्टेडियम की खराब स्थिति से खिलाड़ियों का खेल के प्रति रुझान कम हुआ है। अब यह जगह अराजक तत्वों का अड्डा बन गई है। 24 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मधुबनी आ रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि उन्हें नए स्टेडियम की सौगात मिलेगी। हालांकि पिछले कई वर्षों की घोषणाओं और वादों के बाद जनता का भरोसा कम होता जा रहा है।