सहरसा का मत्स्यगंधा झील पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा। बौद्ध सर्किट की तर्ज पर मिथिला सर्किट का निर्माण हो।कोशी प्रमंडल के राजद एमएलसी अजय कुमार सिंह ने बिहार विधान परिषद में मुद्दा उठाया। इसके बाद सूबे के पर्यटन मंत्री नीतीश मिश्रा ने सदन मे जबाब दिया है।
आरजेडी एमएलसी अजय कुमार सिंह ने बिहार विधान परिषद में मत्स्यगंधा झील को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा जिस तरह बौद्ध सर्किट निर्माण से उस इलाके में विकास हो रहा है। उसी के तर्ज पर मिथिला सर्किट का निर्माण करवाया जाए।
मधेपुरा के सुप्रसिद्ध बाबा सिघेश्वर मंदिर, सहरसा के महिषी उग्रतारा मंदिर, कारू खीरहर मंदिर, कात्यानी मां मंदिर, मां जानकी मंदिर और मधुबनी के उचैट भगवती मंदिर को मिला कर मिथिला सर्किट का निर्माण किया जाने की मांग की गई है।
मिथिला सर्किट के निर्माण से मिलेंगे बेहतर अवसर
पर्यटन के क्षेत्र में मिथिला सर्किट के निर्माण से इन इलाकों में बेहतर अवसर मिलेंगे। ये इस इलाके में विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। सूबे के पर्यटन मंत्री नीतीश मिश्रा ने सदन में जबाब देते हुए कहा कि सहरसा मत्स्यगंधा झील को विकसित के लिए 98 करोड़ का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा है।
राज्य सरकार ने मां सीता के जन्म भूमि मरोनाधाम के लिए 50 एकड़ भूमि अधिग्रहण के मद्दे नजर 120 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है। मां सीता के जन्म भूमि को विकसित करने के लिए भी सुविधा बाहर करने को लेकर पहल की जा रही है।
मधुबनी के उचैट भगवती और सहरसा के उग्रतारा मंदिर को एनएच-527 सड़क मार्ग से कनेक्ट करने योजना पर काम किया जा रहा है। इन पर्यटक स्थल को विकसित की दिशा में कार्य किए जा रहे है। मैंने कहा कि बिहार में पर्यटन को विकसित को लेकर विभाग संकल्पित है।




