द्वितीय वर्ष बी.एड. सत्र 2025–27 के उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के शिक्षा संकाय, बी.एड. (नियमित) में सत्र 2025–27 के द्वितीय वर्ष के प्रशिक्षु शिक्षकों के लिए द्वितीय वर्ष उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन सोमवार को विभाग के बहुउद्देशीय सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षु शिक्षकों को द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम, शैक्षणिक गतिविधियों, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया तथा आगामी सत्र की कार्ययोजना से अवगत कराना था। कार्यक्रम में द्वितीय वर्ष के शत-प्रतिशत प्रशिक्षु शिक्षक उपस्थित रहे।


कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार मिलन एवं विभाग के सभी प्राध्यापक की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन के पश्चात प्रशिक्षु शिक्षकों द्वारा “इतनी शक्ति हमें देना दाता…” प्रार्थना प्रस्तुत की गई, जिसने पूरे वातावरण को सकारात्मक एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार मिलन ने स्वागत भाषण एवं प्रशिक्षु शिक्षकों को संबोधित किया तथा विभाग में नवागत प्राध्यापकों का परिचय कराया। उन्होंने प्रशिक्षु शिक्षकों के पिछले एक वर्ष के शैक्षणिक एवं व्यावहारिक अनुभवों का आकलन करते हुए आगामी शैक्षणिक सत्र की कार्ययोजना साझा की। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की उपलब्धियों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ जो कमियां सामने आई हैं, उन पर भी योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा।

डॉ मिलन ने शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाते हुए प्रशिक्षु शिक्षकों के ज्ञान, कौशल, व्यक्तित्व एवं शिक्षण दक्षता को और अधिक विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने प्रशिक्षु शिक्षकों को सक्रिय एवं नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हुए विभाग के महत्वपूर्ण संदेश “शिक्षार्थी नेतृत्व करें” (Let Learners Lead) को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया में विद्यार्थी केवल ज्ञान प्राप्त करने वाला नहीं, बल्कि अपनी सीखने की यात्रा का सक्रिय नेतृत्वकर्ता होना चाहिए। अपने संबोधन में डॉ. मिलन ने प्रशिक्षु शिक्षकों को जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की प्रेरणा देते हुए कहा कि “जीवन में मुस्कुराना बहुत जरूरी है, मुस्कुराते रहिए।” उन्होंने पिछले सत्र के प्रशिक्षु शिक्षकों के प्रदर्शन की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि विभाग में आने वाले बाह्य परीक्षकों द्वारा यहां के प्रशिक्षु शिक्षकों के प्रदर्शन की निरंतर प्रशंसा की जाती रही है तथा विभाग का परिणाम भी अत्यंत सकारात्मक रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि को विभाग के प्राध्यापकों एवं प्रशिक्षु शिक्षकों के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया और आगामी वर्ष में और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के अगले सत्र में डॉ. निधि वत्स ने द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम एवं पाठ्यचर्या का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने पाठ्यक्रम 7-बी, पाठ्यक्रम 8, पाठ्यक्रम 9, पाठ्यक्रम 10, पाठ्यक्रम 11 एवं शैक्षिक व्यावसायिक पाठ्यक्रम–4 सहित द्वितीय वर्ष के विभिन्न पाठ्यक्रमों की संरचना, विषयवस्तु, शैक्षणिक अपेक्षाओं एवं अध्ययन प्रक्रिया के संबंध में प्रशिक्षु शिक्षकों को विस्तार से जानकारी दी। डॉ. निधि वत्स ने प्रशिक्षु शिक्षकों को समझाया कि द्वितीय वर्ष का पाठ्यक्रम केवल परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि एक दक्ष एवं संवेदनशील शिक्षक के निर्माण की दिशा में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने प्रशिक्षु शिक्षकों को नियमित अध्ययन, कक्षा सहभागिता, व्यावहारिक गतिविधियों एवं शैक्षणिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। इस दौरान प्रशिक्षु शिक्षकों के साथ प्रश्नोत्तर एवं संवाद सत्र भी आयोजित किया गया। प्रशिक्षु शिक्षकों ने पाठ्यक्रम एवं आगामी शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित अपनी जिज्ञासाएं एवं समस्याएं साझा कीं, जिनका समाधान करते हुए उन्हें आवश्यक सुझाव एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया। संवादात्मक सत्र ने प्रशिक्षु शिक्षकों में पाठ्यक्रम को लेकर स्पष्टता एवं आत्मविश्वास का संचार किया। शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की रही गरिमामयी उपस्थिति कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार मिलन के साथ डॉ. निधि वत्स, डॉ. कुमारी स्वर्णरेखा, डॉ. उदय कुमार, कुमार सत्यम, गोविंद कुमार, डॉ. जयशंकर सिंह, डॉ. रेशमा तबस्सुम, डॉ. श्वेता झा, डॉ. अक्षय कुमार,डा. मो. सबिहुर रहमान, डॉ. कन्हैया पांडे, डॉ. नम्रता पराशर , डॉ. शंभू प्रसाद, डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा, डॉ. शगुफ्ता जबीन एवं डॉ. आनंद मोहन सहित विभाग के प्राध्यापकगण उपस्थित रहे। वहीं शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों में अशोक कुमार चौधरी, सीमा झा सहित अन्य शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की भी सहभागिता रही। कार्यक्रम में द्वितीय वर्ष सत्र 2025–27 के शत-प्रतिशत प्रशिक्षु शिक्षकों की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम के समापन सत्र में डॉ. अक्षय कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने विभागाध्यक्ष के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार विभागाध्यक्ष निरंतर प्रशिक्षु शिक्षकों में ऊर्जा, आत्मविश्वास एवं सकारात्मक सोच का संचार करते रहे हैं, वह विभाग के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि विभाग एवं विश्वविद्यालय प्रशिक्षु शिक्षकों के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास के लिए सदैव उनके साथ है। डॉ. अक्षय कुमार ने सभी प्राध्यापकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों एवं प्रशिक्षु शिक्षकों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रशिक्षु शिक्षकों को आगामी नियमित कक्षाओं में निरंतर उपस्थित रहकर अध्ययन एवं शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया तथा कहा कि नियमित कक्षाओं से प्रशिक्षु शिक्षकों के ज्ञान, कौशल, व्यक्तित्व एवं व्यावसायिक विकास को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम का समापन सकारात्मक ऊर्जा, उत्साह एवं नए शैक्षणिक संकल्प के साथ हुआ। द्वितीय वर्ष का यह उन्मुखीकरण कार्यक्रम प्रशिक्षु शिक्षकों को आगामी शैक्षणिक यात्रा के लिए दिशा, दृष्टि, पाठ्यक्रम की स्पष्ट समझ और नई ऊर्जा प्रदान करने में सफल रहा। “शिक्षार्थी नेतृत्व करें” के संदेश के साथ आयोजित यह उन्मुखीकरण कार्यक्रम प्रशिक्षु शिक्षकों को सीखने, नेतृत्व करने और एक संवेदनशील, दक्ष एवं उत्तरदायी शिक्षक के रूप में स्वयं को विकसित करने की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ।
