मिथिला में राष्ट्रीय लोक उत्सव का आयोजन, लोक कला और संस्कृति का हुआ प्रदर्शन।
मधुबनी: मधुबनी जिले के परिहरपुर में बच्चों के हुनर को नया मार्ग देने के उद्देश से एक स्कूल में राष्ट्रीय लोक उत्सव का आयोजन किया गया है. इसमें बहुत से बच्चों और युवाओं ने भाग लिया है. यहां वे उन कलाओं को दिखा रहे हैं, जो कि लगभग खत्म होने की कगार पर हैं. इस दौरान महोत्सव के सचिव, साहित्य अकादमी से पुरस्कार प्राप्त साहित्यकार ऋषि वशिष्ठ ने कहा कि इस उत्सव में कई ऐसी कलाओं का प्रदर्शन किया जा रहा है, जो मिथिला में लोग कभी धूमधाम से देखा और सुना करते थे.
महोत्सव में लोक-संगीत, नृत्य, नाट्य- प्रदर्शन, पमार, झिझिया, डोमकछ, दीना-भद्री गाथा, छकड़बाजी नाच, रसनचौकी वादन, मैथिली लोक गीत, कारख महाराय गायन, महेशवाणी व नचारी गायन, जट जटिन नृत्य एवं लोक नाट्य “चुहरमल के वियाह”, नटुआ नाच, सलहेस गायन, सती बिहुला गायन, भाउ-भगत, पमरिया गायन का प्रदर्शन किया गया.
संस्था से जुड़े यदुवीर यादव ने कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में इन अमूल्य धरोहरों के संरक्षण व संवर्द्धन का दायित्व केवल सरकारों का ही नहीं, व्यक्ति और समुदाय का भी है. इसी दायित्व का निर्वहन “अछिञ्जल” नाम की संस्था कर रही है. उन्होंने बताया कि अछिञ्जल संस्था इस क्रम में सलहेस सामाजिक उत्सव, डाक-वचन, पञ्जी प्रबंध, रसनचौकी आदि पर शोधपरक कार्य करती है. साथ ही नाट्य प्रस्तुति तैयार कर देश के विभिन्न भाग में प्रस्तुति करती है. वर्ष 2016 से प्रतिवर्ष मधुबनी के अलग-अलग गावों में प्रदर्शन किया जा रहा है.
