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बिहार : केके पाठक की राह पर एस सिद्धार्थ, 8000 अफसर को बिहार शिक्षा विभाग ने दे दिया टारगेट; चूके तो कार्रवाई तय 

बिहार के सरकारी स्कूलों में निरीक्षण के दौरान लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। शिक्षा विभाग ने कहा है कि अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे स्कूलों की कमियों को दूर करें। तीन माह के लिए प्रत्येक अधिकारी को 10-15 स्कूल आवंटित किए जाएंगे, जिनकी नियमित मॉनिटरिंग होगी।
खबिहार शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि सरकारी स्कूलों के निरीक्षण में अब लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए स्कूलों का निरीक्षण करता है और वास्तविक कमियों को दूर कराने में लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ एस सिद्धार्थ ने सभी जिलों के अधिकारियों को इस बारे में पत्र लिखकर कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।  जांच को 8 हजार अधिकारी मैदान में दरअसल, शिक्षा विभाग का मानना है कि स्कूलों में सुधार की जिम्मेदारी निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की ही है। उन्हें सिर्फ कमियां ढूंढने के बजाय उन्हें दूर कराने के लिए लगातार प्रयास करने चाहिए। इसके लिए 6 जून 2024 से ही करीब 8 हजार अधिकारी और कर्मचारी सभी जिलों के सरकारी स्कूलों का नियमित निरीक्षण कर रहे हैं। इस पूरे अभियान का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी स्कूल तय मानकों के अनुसार चल रहे हैं या नहीं। निरीक्षण के दौरान शिक्षकों और बच्चों की उपस्थिति, स्कूल के भवन और अन्य सुविधाओं की स्थिति और पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी गतिविधियों पर ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे न सिर्फ स्कूलों का माहौल बेहतर होगा बल्कि अभिभावकों का सरकारी स्कूलों के प्रति भरोसा भी बढ़ेगा। मुख्य सचिव करेंगे निरीक्षण रिपोर्ट की समीक्षा अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों से कहा है कि स्कूलों के जो निरीक्षण रिपोर्ट उन्हें मिलें उसकी समीक्षा वह खुद भी करेंगे। अगर ऐसी कोई कमी सामने आती है जिसे दूर करने में जिला स्तर पर दिक्कत हो रही है तो उसका प्रस्ताव शिक्षा विभाग को भेजा जाए। स्कूलों की निगरानी की यह जिम्मेदारी जिला उप विकास आयुक्त के नेतृत्व में शिक्षा विभाग के सभी पदाधिकारियों और कर्मचारियों को सौंपी जाएगी। हर अधिकारी को तीन महीने के लिए 10 से 15 स्कूल सौंपे जाएंगे जिनकी देखरेख की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं की होगी। जांच रिपोर्ट में भिन्नता पर कार्रवाई तय इसके अलावा राज्य मुख्यालय भी हर हफ्ते बिना पूर्व सूचना के 10 स्कूलों की सूची जिलों को भेजेगा। इन स्कूलों की जांच उप विकास आयुक्त, वरिष्ठ उप समाहर्ता और अनुमंडल पदाधिकारी खुद करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखने के लिए राज्य स्तर पर एक ‘मॉनिटरिंग कोषांग’ बनाया गया है। यह कोषांग ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अपलोड की गई निरीक्षण रिपोर्ट का मिलान करेगा। जो रिपोर्ट जिलाधिकारी के नोडल अधिकारी द्वारा भेजी जाएगी उससे भी इसका मिलान किया जाएगा। अगर रिपोर्ट में कोई अंतर पाया गया तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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