बिहार विधानसभा में एक विधायक पर 4 मार्शल तैनात।
रण क्षेत्र में तब्दील हो जाता है सदन : कई बार बिहार विधानसभा परिसर रण क्षेत्र में तब्दील हो जाता है. अतीत में कई ऐसी घटनाएं हुई, जिससे लोकतांत्रिक प्रणाली शर्मसार हुई. हाल में जुलाई 2025 के मानसून सत्र के दौरान विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर ज़बरदस्त हंगामा हुआ था. विधायकों के बीच झड़प और मार्शल के साथ धक्का-मुक्की हुई.
बीजेपी विधायकों ने भी किया था बवाल : जुलाई 2023 में भी कानून व्यवस्था के मुद्दे पर हंगामा हुआ था. इस दौरान बीजेपी विधायकों को सदन से बाहर निकाला गया था. साल 2021 में अभूतपूर्व हंगामा हुआ था. पूरे देश में बिहार की फजीहत हुई थी. विपक्षी विधायकों ने सदन के अंदर जो हालात पैदा किए थे, वह शर्मनाक था.
मारपीट की आ गयी थी नौबत: बिहार विधानसभा में 23 मार्च 2021 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक के विरोध के दौरान सदन के अंदर पुलिस बुलानी पड़ी थी. राष्ट्रीय जनता दल के विधायक बिल का विरोध कर रहे थे. विरोध इतना तीव्र हुआ कि मारपीट की नौबत आ गई. कई विधायकों को टांग कर बाहर ले जाना पड़ा था.
पहले सिर्फ 35 मार्शल थे:बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक सदन की कार्रवाई में हिस्सा लेते हैं. सदन ठीक से चले इसके लिए मार्शल की तैनाती होती है. बिहार विधानसभा में मार्शल की संख्या 35 थी. जब कभी हंगामा होता था तो मार्शल को हालात पर काबू पाने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था.
विपक्ष के एक विधायक पर 4 मार्शल: वर्तमान में कुल मिलाकर 300 से अधिक नई भर्ती हुई है. कुल 146 मार्शल की नियुक्ति की गई है. विधानसभा में कुल 181 मार्शल कार्यरत हैं. विपक्ष के पास कुल 41 विधायक हैं. इस हिसाब से विपक्ष के एक विधायक पर 4 से अधिक मार्शल का अनुपात है. जब कभी हंगामा होगा तो अब वैसी स्थिति में पुलिस वालों को बुलाने की जरूरत नहीं होगी.
“बिहार विधानसभा की कार्रवाई को ठीक तरीके से चलने की अध्यक्ष की जिम्मेदारी होती है. सदन के संचालन में मार्शल की भूमिका अहम होती है. पहले से तैनात मार्शल की संख्या कम थी. बहुत दिनों से नियुक्ति नहीं हुई थी. इस बार बड़े पैमाने पर मार्शल की भर्ती हुई है.”-नंदकिशोर यादव, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष
एक विधायक पर 4 से अधिक मार्शल का अनुपात
‘कार्य प्रणाली में सुधार’:भाकपा माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि पूर्व में नंदकिशोर यादव विधानसभा के अध्यक्ष थे. उनका कार्यकाल संतोषजनक रहा. उन्होंने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए, जिससे कि विधानसभा की कार्य प्रणाली में सुधार आयी. सुरक्षा महत्वपूर्ण विषय था, जिस पर कार्रवाई की गई.
‘मार्शल से डरने वाले नहीं..’: राष्ट्रीय जनता दल के विधायक और पूर्व मंत्री सुरेंद्र राम ने कहा कि विपक्ष सकारात्मक सहयोग के लिए तैयार है. हम लोग जनता से जुड़े मुद्दे को उठाते रहेंगे. हमलोग सुरक्षा कर्मी या मार्शल से डरने वाले नहीं है. हम सकारात्मक सहयोग करेंगे, लेकिन जनता के सवाल को उठाना हमारा काम है.
“हमलोग मार्शल से डरने वाले नहीं हैं. तैनाती बढ़ाने से कुछ नहीं होगा. जनता के मुद्दों को उठाते रहेंगे. हमलोग सदन में सकारात्मक सहयोग के लिए हमेशा तैयार हैं.”– सुरेंद्र राम, राजद विधायक
18वां विधानसभा का गठन: बिहार में 18वां विधानसभा का गठन हो चुका है. शीतकालीन के रूप में नई सरकार का यह पहला सत्र है. मार्शल की तैनाती से इस बार विधानसभा का नजारा बदला सा है. विधानसभा परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है.
किसके पास कितने विधायक: नयी सरकार में एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जिसमें बीजेपी के पास 89, जदयू के पास 85, लोजपा रामविलास के पास 19, हम के पास 5 और RLM के पास 4 विधायक हैं. विपक्षी में 41 विधायक चुनाव जीतकर आए हैं. इसमें राजद के पास 25, कांग्रेस के पास 6, सीपीआई एमएल के पास 2, सीपीआईएम और आईआईपी के पास 1-1 विधायक हैं. AIMIM के पास 5 और बसपा के पास एक विधायक हैं.
