राय की अध्यक्षता में शोक सभा का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने स्व. अंजान के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि कम्युनिस्ट नेता, स्वामीनाथन कमीशन के
इकलौते किसान सदस्य, लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष, एआईएसएफ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष का निधन अपूर्णिय क्षति है। वह एक प्रखर वक्ता थे। वह
देश के दलित, शोषित, पीड़ित, किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान के पीड़ा को बड़ी प्रमुखता से किसी भी पटल पर रखते थे। उनके जाने से पूरे देश में सभी वर्गों में
काफी हताश है। पार्टी इस अवसर पर पूरे देश में तीन दिवसीय शोक घोषित की है। ज्ञात हो कि 3 मई को अहले सुबह बरसों से कैंसर से पीड़ित अतुल कुमार
अंजान का निधन लखनऊ के निजी अस्पताल में हो गयी। वे अपने पीछे पूरे भरे पूरे परिवार को छोड़कर गए हैं। कल संध्या 4:00 बजे देश के सभी वामपंथी दलों के शिष्य नेतृत्व व इंडिया गठबंधन के नेतृत्व के मौजूदगी में
उनका अंतिम संस्कार हुआ। उनका बिहार से काफी गहरा नाता था। वे कम्युनिस्ट पार्टी में उत्तर पूर्वी भारत के बड़े नेताओं के तौर पर अपनी पहचान बनाए थे। वे हिंदी, ब्रिजिका, भोजपुरी, जापानी, इंग्लिश, उर्दू सहित कई भाषाओं के विद्वान थे। उनका जन्म बिहार के बांका
जिला में हुआ था। उनके शोक सभा में किसान सभा के राज्य अध्यक्ष राम कुमार झा, नारायणजी झा सचिव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, अहमद अली तमन्ना सचिव किसान सभा दरभंगा जिला, मणिकांत झा, चंद्र किशोर झा, जीवछ पंडित, विश्वनाथ मिश्र, शिव कुमार सिंह, हर्ष
राजवर्धन रामनाथ पंजियार, पवन चौधरी, राम आशीष राम, अखिलेश चौधरी, सुधीर कुमार, शरद कुमार सिंह, हरे कृष्णा राम, ललित कुमार मिश्रा आदि ने गहरा शोक व्यक्त किया है।





