विश्वविद्यालय थानाक्षेत्र से गायब हुए तालाब मामले में जिलाधिकारी ने लिया संज्ञान।
दरभंगा में जमीन की कीमतों बढ़ोत्तरी के बाद सरकारी जमीनों पर भूमाफियाओं की नजर टिक गई है। इसका परिणाम यह हुआ कि दरभंगा शहर से धीरे-धीरे तालाब गायब हो गए। इसी प्रकार का एक ताजा मामला शहर के विश्वविद्यालय थानाक्षेत्र का सामने आया है। अब इसपर दरभंगा के जिलाधिकारी राजीव रौशन ने संज्ञान लिया है और अपने अधीनस्थ अधिकारियों से रिपोर्ट तलब किया है।
दरअसल विश्वविद्यालय थाना इलाके के वार्ड नंबर चार के नीम पोखर इलाके में भूमाफिया ने एक तालाब को गायब कर दिया। उसने तालाब में मिट्टी भरवा दी और अपना कब्जा दिखाने के लिए तालाब के ऊपर एक झोपड़ी भी बना लिया। इस बात की सूचना स्थानीय लोगों ने एसडीपीओ को दी, तब जाकर प्रशासनिक अमले की आँख खुली।
मंगलवार को इसपर प्रतिक्रिया देते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि इस मामले सदर अंचलाधिकारी से जानकारी ली गयी है। उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में अपर समाहर्ता के कार्यालय में जमाबंदी रद्द करने का मामला चल रहा था। इस मामले में परिवादी के पक्ष में निर्णय दिया गया। सदर अंचलाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि शीघ्र उनके न्यायालय में अपील दायर करें। साथ ही जबतक मामला लंबित है, तबतक उक्त स्थल पर किसी के द्वारा भरने अथवा निर्माण करने पर रोक लगाया जाय।
जिलाधिकारी ने कहा कि जो भी सार्वजनिक तालाब, पोखर, आहर, पाइन आदि हैं, वे सभी जल जीवन हरियाली के तहत प्रथम अवयव के श्रेणी में आते हैं। इसके तहत इन्हें अतिक्रमण मुक्त करना है।
जिलाधिकारी ने कहा कि इसके अलावा जो भी निजी तालाब, पोखर आदि हैं, उनके मामले में भी कई न्यायालयों का आदेश है कि उनके स्वरूप में भी परिवर्तन नहीं करना है। इससे पर्यावरण तथा जल के बहाव आदि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस पर भी सभी राजस्व कर्मियों को ध्यान देने को कहा गया है।
भरे गए तालाब के संबंध में उन्होंने कहा कि जमाबंदी रद्द करने के बाद को निरस्त करके जमाबंदी कायम रखने का निर्णय किन कागजातों के आधार पर किया गया, उसे भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
