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लनामिवि, दरभंगा में शिक्षक दिवस पर कुलपति की अध्यक्षता में ‘शिक्षक सम्मान समारोह सह विचारगोष्ठी आयोजित’


प्राचीन शिक्षा व्यवस्था चरित्र निर्माण एवं संस्कार पर आधारित, पर आधुनिक शिक्षा प्रणाली कौशल पर अवलंबित- कुलपति
विश्वविद्यालय के सभी अंगीभूत एवं सम्बद्धता प्राप्त कॉलेजों के वर्षभर में अवकाश ग्रहण करने वाले शिक्षकों को किया गया सम्मानित

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में ‘शिक्षक दिवस’ के अवसर पर जुबिली हॉल में शिक्षक सम्मान समारोह सह “आधुनिक शिक्षा एवं भारतीय ज्ञान-परंपरा में शिक्षकों की भूमिका” विषय पर विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें सारण क्षेत्र से बिहार विधान परिषद् के सदस्य प्रो वीरेन्द्र नारायण यादव- मुख्य अतिथि, दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद सर्वेश कुमार- सम्मानित अतिथि, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व प्रति कुलपति प्रो सिद्धार्थ शंकर सिंह- मुख्य वक्ता तथा एलएनएमयू मुटा के पूर्व महासचिव प्रो अमरेश शांडिल्य- विशिष्ट वक्ता के रूप में शामिल हुए।


समारोह का प्रारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग के छात्र-छात्राओं द्वारा राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, कुलगीत एवं बिहार-गीत प्रस्तुत किया गया। समारोह का समापन राष्ट्रगान से हुआ। प्रारंभ में अतिथियों ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। अतिथियों का स्वागत पाग, चादर, मोमेंटो एवं पुष्पगुच्छ से किया गया। समारोह में संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, सहयोगी कर्मचारी, अवकाश प्राप्त शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं आदि उपस्थित थे।


इस अवसर पर गत एक वर्ष में अवकाश ग्रहण करने वाले 86 शिक्षकों को पाग, चादर एवं प्रशस्ति पत्र आदि प्रदान कर कुलपति एवं अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। वहीं इस समारोह में विश्वविद्यालय के सभी पदाधिकारियों को भी कुलपति ने प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। प्रो मुनेश्वर यादव के कुशल संचालन में आयोजित समारोह में स्वागत संबोधन कुलसचिव डॉ दिव्या रानी हांसदा ने, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कुलानुशासक सह संयोजक प्रो विजय कुमार यादव ने किया।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी ने कहा कि शिक्षा विकास का बेहतरीन माध्यम है। प्राचीन शिक्षा व्यवस्था जहां चरित्र निर्माण एवं संस्कार पर आधारित है, वहीं आधुनिक शिक्षा प्रणाली कौशल पर अवलंबित है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 छात्रों के समग्र विकास के लिए लागू किया गया है, जिसके द्वारा किसी भी विषय का छात्र किसी न किसी प्रकार का कौशल अवश्य प्राप्त कर सकता है। आधुनिक शिक्षा कौशल विकास पर ज्यादा फोकस्ड है। भारतीय ज्ञान परंपरा में मुख्यतः तीन बातें- योग, आयुर्वेद एवं दर्शन समाहित हैं। कुलपति ने शिक्षक दिवस के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक अगली पीढ़ी को शिक्षा के साथ संस्कार भी देता है। आज के दिन हम सब शपथ ले कि हम लोग अच्छा वातावरण बनाएंगे, ताकि छात्रों के साथ ही समाज का भी विकास हो सके। कुलपति ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार हेतु कई बहुमूल्य सुझाव भी दिये।
मुख्य अतिथि प्रो वीरेन्द्र नारायण यादव ने डॉ राधा कृष्णन के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि वे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में भी काफी सफल रहे। कहा कि राजा महाराजा के समय से ही शिक्षकों का समाज काफी में आदर रहा है। उन्होंने अनेक प्रेरक एवं आदर्श शिक्षकों की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि आज के दिन शिक्षकों को सम्मान देना बहुत बड़ी बात है। इससे शिक्षा हेतु बेहतर वातावरण बनेगा, क्योंकि शिक्षकों को सम्मान देकर ही उनसे बेहतर छात्र-निर्माण करवाया जा सकता है।
एमएलसी सर्वेश कुमार ने शिक्षक दिवस की बधाई एवं शुभकामना देते हुए कहा कि भारत के महान शिक्षक एवं दार्शनिक डॉ राधाकृष्णन के जन्मदिन को हमारे देश में ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाने की परंपरा रही है। यह एक लोकप्रिय दिवस है, जिस दिन शिक्षक गण और बेहतर करने का संकल्प लेते हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्ञान के साथ ही छात्रों का चरित्र निर्माण करना एवं संस्कार देना शिक्षकों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिकता से जोड़कर ही बेहतर ढंग से आगे बढ़ा जा सकता है।
मुख्य वक्ता प्रो सिद्धार्थ शंकर सिंह ने हमारी गुरुकुल प्रणाली में सबको मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा दी जाती थी। गुरु अपने ज्ञान एवं आचरण से छात्रों को व्यावहारिक शिक्षा एवं सही दिशा देकर आदर्श नागरिक के रूप में उन्हें लक्ष्य तक पहुंचाने थे। उन्होंने मिथिला की ज्ञान परंपरा की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि यहां के छात्रों के सर्वांगीण विकास हेतु गुरुकुलों में उन्हें शिक्षा, संस्कार, मानवीय मूल्य एवं रोजगार योग्य बनाया जाता था। कहा कि वैदिक युग से ही सभी कालों में भारतीय ज्ञान परंपरा में समृद्धि होती रही है। आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के द्वारा देश का आर्थिक एवं बौद्धिक विकास किया जा रहा है।
विशिष्ट वक्ता प्रो अमरेश शाण्डिल्य ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा अति प्राचीन, असीम, समृद्ध एवं चिरंतन है। वैदिक ज्ञान परंपरा वर्षों से मौखिक रूप में आगे बढ़ती रही। कहा कि मैकाले की शिक्षा पद्धति- 1835 द्वारा हमारे ऊपर अंग्रेजी शिक्षा थोपकर गुरुकुल शिक्षा को ध्वस्त किया गया। प्राचीन ज्ञान परंपरा को नई तकनीक से जोड़कर बेहतरीन बनाया जा सकता है।


स्वागत संबोधन में कुलसचिव डॉ दिव्या रानी हांसदा ने कहा कि शिक्षक सिर्फ पढाता ही नहीं, बल्कि देश का भविष्य सवांरता है। शिक्षक समाज का प्रमुख स्तंभ है जो छात्रों को सही एवं गलत का ज्ञान देता है। कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़कर भारत को पुनः विश्वगुरु तथा विकसित राष्ट्र बनाया जा सकता है।

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