Monday, May 25, 2026
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ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग के वरीय शिक्षक डॉ मुकुल बिहारी वर्मा के सेवानिवृत्ति के अवसर पर छात्र-छात्राओं व शोधार्थियों द्वारा भव्य सम्मान समारोह का आयोजन

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ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग के वरीय शिक्षक डॉ मुकुल बिहारी वर्मा के सेवानिवृत्ति के अवसर पर छात्र-छात्राओं व शोधार्थियों द्वारा भव्य सम्मान समारोह का आयोजन विभागाध्यक्ष डॉ अनिल कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।

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अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विभागाध्यक्ष डॉ अनिल कुमार चौधरी ने डॉ मुकुल बिहारी वर्मा के सरल स्वभाव एवं अकादमिक प्रतिबद्धता की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

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पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो अनिल कुमार झा ने डॉ वर्मा के सम्मान में आयोजित समारोह में छिपे विदाई की भावना को गुरु-शिष्य परंपरा की दीर्घकालिक जीवंतता हेतु प्रासंगिक कहा। इसे विश्वविद्यालय परिसर में निरंतर बरकरार रखने की भी अपेक्षा की। प्रो झा ने डॉ वर्मा को अपने छात्र जीवन से सेवानिवृत्ति तक के अकादमिक अनुभव को लिखने व प्रकाशित करने का सुझाव भी दिया।दरअसल 31 मई, 2026 को डॉ वर्मा सेवानिवृत्त हो रहे हैं। अपने 30 वर्ष की सेवा अवधि की शुरुआत उन्होंने बतौर सहायक प्राध्यापक नवंबर 1996 में रामाश्रय बालेश्वर महाविद्यालय, दलसिंहसराय, समस्तीपुर से की। इस कॉलेज में अपने 25 वर्ष के लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने इन्टरमीडिएट, स्नातक एवं 2011 से स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राओं को भी अध्यापन कराया। 2021 में मिथिला विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रो सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने डॉ वर्मा का स्थानांतरण विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग में कर दिया, जहां डॉ वर्मा ने छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों व शिक्षकों के मध्य अपनी अद्वितीय छवि बनाई। उनके विषय में अनुभव साझा करते हुए पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो मुनेश्वर यादव ने डॉ वर्मा की विशेषताओं में प्रतिबद्धता, समग्रता, विशेषज्ञता एवं एकात्मकता का उल्लेख करते हुए एक ‘पूर्ण समर्पित अकादमिक व्यक्तित्व’ बताया।

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गौरतलब है कि सम्मान समारोह का आयोजन कौटिल्य कक्ष पारंपरिक औपचारिक स्वागत एवं दीप प्रज्वलन के उपरांत विभाग के शिक्षक व विश्वविद्यालय उप-परीक्षा नियंत्रक, प्रौद्योगिकी एवं व्यावसायिक शिक्षा डॉ मनोज कुमार ने स्वागत भाषण के दौरान डॉ वर्मा के विषय में अनुभव साझा करते हुए उन्हें विशाल ‘वटवृक्ष’ की संज्ञा दी। अपने सम्बोधन के दौरान डॉ कुमार काफी भावुक हुए।विभाग के शिक्षक डॉ रघुवीर कुमार रंजन ने डॉ वर्मा में सत्यनिष्ठा, समन्वयकारी स्वभाव व सूक्ष्म अवलोकन की विशिष्टताओं का उल्लेख किया। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए आर. बी. कॉलेज, दलसिंहसराय में राजनीति विज्ञान विभाग के वर्तमान अध्यक्ष उदय शंकर विद्यार्थी ने डॉ वर्मा को शिक्षा के क्षेत्र में मूल्यों का संरक्षक बताया। उच्च शिक्षा में मूल्यों के होते निरंतर ह्रास के दौर में डॉ वर्मा को उन्होंने आदर्श के रूप में छात्र-छात्राओं व शिक्षकों के लिए अनुकरणीय बताया।

कार्यक्रम में डॉ वर्मा से प्रेरित दलसिंहसराय व विश्वविद्यालय में विभिन्न सत्र के पूर्व व वर्तमान छात्र-छात्राओं की उपस्थिति शोभनीय बना रही थी। इसमें डॉ नीरज कुमार झा व मनीष कुमार जैसे वे छात्र भी शामिल थे जो वर्तमान में सहायक प्राध्यापक के रूप में सेवा दे रहे हैं।

मंच संचालन कर रहे शोधार्थी नितीश नायक व अक्षय कुमार झा ने बताया कि समारोह में डॉ वर्मा के विषय में उद्गार व्यक्त करने की आपाधापी थी, जिसके कारण शिक्षकों को बोलने का बहुत कम समय मिल सका, परंतु इससे यह भी पता चलता है कि छात्र-छात्राओं की सहभागिता ने इस कार्यक्रम के आयोजन व सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।

इस समारोह में डॉ वर्मा के दोनों संतान- आयूष वर्मा (पुत्र) एवं स्वाकंदना वर्मा (पुत्री) भी उपस्थित रहे। आयूष वर्मा ने एक सम्मानित व्यक्ति की सेवानिवृत्ति की कोई आयु न होने की बात की। वहीं उनकी पुत्री ने पिता को प्रेरणा पुरुष कहा और अपने जीवन के विभिन्न पक्षों पर पिता के गुणों के प्रभावों का उल्लेख किया।

समारोह में डॉ वर्मा के पर्यवेक्षण में शोध कर रहे कुंदन कुमार कात्यायन ने अपना उद्गार व्यक्त करते हुए महेन्द्र कपूर के द्वारा गाए ‘ न मुंह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो…’ गीत गाकर समारोह को आनंदप्रद बना दिया।

समारोह में डॉ वर्मा ने भव्य कार्यक्रम के आयोजन के लिए शोधार्थी संदीप कुमार चौधरी, कुन्दन कुमार कात्यायन, सागर सिंह, सुमन मण्डल, सिद्धार्थ राज, दीपक झा, केशव चौधरी, देवेन्द्र, रिक्की, मेघा, शाम्भवी, श्वेता, अनीश एवं अन्य शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं को आशीर्वाद दिया और प्रशंसा की। कार्यक्रम में भीषण गर्मी के बावजूद दूर-दूर से आए छात्र-छात्राओं के प्रति सुहृदयता प्रकट की विशेषकर दलसिंहसराय के शिक्षकों, छात्र-छात्राओं को देख डॉ वर्मा आश्चर्य व आनंद से भरे थे। यह स्वाभाविक भी था, क्योंकि अपने सेवाकाल का 25 वर्ष उन्होंने दलसिंहसराय में ही दिया। डॉ वर्मा ने विभागीय शिक्षकों से पूर्व की भांति अध्ययन-अध्यापन को बदस्तूर जारी रखने आशा व्यक्त की। छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं सज्जनों ने अनेकानेक अपहार प्रदान किए और डॉ मुकुल बिहारी वर्मा की स्वस्थ व लंबी की शुभकामनाएं दी।

कार्यक्रम का समापन विभाग की शिक्षिका डॉ नीतु कुमारी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। नीतु कुमारी ने विभाग से डॉ वर्मा की विदाई को अपूरणीय क्षति के रूप में अभिव्यक्त किया। सभी प्रतिभागियों ने शिक्षकों के कभी भी सेवा निवृत्त न होने के आदर्श वाक्य के सामूहिक उद्घोष के साथ डॉ वर्मा को खुशी-खुशी विदा किया। विभागाध्यक्ष डॉ अनिल कुमार चौधरी ने डॉ वर्मा को अपने कार से ससम्मान निवास तक पहुंचाया। जन्म दिन सह सम्मान समारोह सह विदाई समारोह के आयोजन में मुख्य रूप से छात्र-छात्राओं का नेतृत्व कर रहे शोधार्थी एवं विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में सक्रिय संदीप कुमार चौधरी ने बताया कि कार्यक्रम के निर्णय निर्माण से लेकर समापन तक सभी साथियों व अनुज छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही। कार्यक्रम हेतु अनुमति प्रदान करने के लिए उन्होंने विभागाध्यक्ष का व सहमति व सहयोग प्रदान करने वाले विभाग के शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि यह कार्यक्रम आने वाले समय में एक आदर्श व प्रेरणा प्रदान करेगा।

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