पुलिस ने तकनीकी और वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर इस मामले में छह अपराधियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से 1,09,500 रुपये नकद, लूट में प्रयुक्त मोटर साइकिल, मोबाइल फोन और लूटा गया बैग बरामद किया गया है।
सीएसपी संचालक ने रची लूट की साजिश रची
कमतौल एसडीपीओ शुभेंद्र कुमार सुमन ने बताया कि पूछताछ में सामने आया कि लूट की साजिश एक अन्य सीएसपी संचालक धर्मवीर कुमार साह ने रची थी। धर्मवीर का सीएसपी केंद्र कम चलता था, जबकि भोला यादव के केंद्र पर अधिक ग्राहक आते थे।
प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने और भोला यादव का केंद्र बंद कराने के इरादे से धर्मवीर ने अपने साथियों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया।
योजना बनाकर अपराधियों ने लूटपाट की
धर्मवीर कुमार साह ने महावीर मंदिर, कमरौल बस्तवारा में सुमन सौरभ, पिन्कु कमती, ललित यादव, रौशन उर्फ बेंगा, मो. सलमान और मो. नूर सहित कुल सात अपराधियों के साथ मिलकर लूट की योजना बनाई थी।
योजना के तहत, धर्मवीर अपने सीएसपी केंद्र सिंहवाड़ा लौट आया। पिन्कु कमती, ललित यादव और रौशन उर्फ बेंगा बाइक से घटनास्थल कटासा रोड पर पहुंचे। वहीं, सुमन सौरभ, मो. सलमान और मो. नूर मोटर साइकिल से सिंहवाड़ा में अभिषेक मिश्रा की दुकान पर रुके।
बैंक में मौजूद सुमन सौरभ, सलमान और नूर ने भोला यादव की रेकी की। जैसे ही भोला यादव बैंक से पैसे लेकर निकले, सुमन ने अपने साथियों को सूचना दी।
कटासा रोड पर घात लगाए अपराधियों ने लूट को अंजाम दिया और रकम लेकर दरभंगा-अलीनगर गाछी पहुंचे, जहां पैसे वाला बैग झाड़ियों में फेंक दिया।
इसके बाद लुटेरों ने आपस में पैसे बांट लिए। ललित यादव ने घटना में इस्तेमाल की गई बाइक अपने साले आकाश कुमार के घर छिपाने के लिए दे दी थी।
पुलिस की तकनीकी टीम अपराधियों तक पहुंची, छह आरोपी को किया गिरफ्तार
पुलिस की तकनीकी टीम ने लगातार निगरानी, मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण के आधार पर छह अपराधियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए अपराधियों में सुमन सौरभ उर्फ सुमन पासवान (26 वर्ष), धर्मवीर कुमार साह (25 वर्ष), पिन्कु कुमार कमती (23 वर्ष), मो. सलमान (23 वर्ष), आकाश कुमार (24 वर्ष) और अभिषेक मिश्रा (25 वर्ष) शामिल हैं।
पुलिस ने कुल 1,09,500 रुपये नकद, चार स्मार्टफोन, लूट में प्रयुक्त मोटर साइकिल और लूटा गया बैग व कागजात बरामद किए हैं। धर्मवीर कुमार साह को इस घटना का मास्टरमाइंड बताया गया है। सुमन सौरभ और अभिषेक मिश्रा का आपराधिक इतिहास भी है।
इस मामले में तीन अन्य अपराधी ललित यादव, रौशन दास उर्फ बेंगा और मो. नूर अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और तकनीकी अनुसंधान के कारण एक सप्ताह के भीतर इस बड़ी लूट का सफल उद्भेदन हो सका। पुलिस की इस कार्रवाई की स्थानीय लोगों द्वारा सराहना की जा रही है।





