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विद्यापति के द्वारा रचित पदावलियों पर विशेष प्रकाश डाला।

रहिका प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत सौराठ‌ गांव स्थित मिथिला चित्रकला संस्थान में महाकवि विद्यापति को स्मरणीय एवं सांस्कृतिक चेतना को समर्पित कला समागम पर आधारित दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित की गई।‌ विद्यापति कला उत्सव-2025 कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन जिला पदाधिकारी-सह-निदेशक, मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी की ओर से संस्थान के बहुउद्देशीय सभागार में किया गया।

 

उद्घाटन समारोह में पद्मश्री दुलारी देवी, पद्मश्री शिवन पासवान, नीतीश कुमार, उपनिदेशक मिथिला चित्रकला संस्थान डा रानी झा, प्रतीक प्रभाकर, कनीय आचार्य, सुरेन्द्र प्रसाद यादव, लेखा पदाधिकारी विकास कुमार मंडल, रूपा कुमारी, सहायक एवं आज के विद्यापति परिचर्चा के वक्ता डा निक्की प्रियदर्शनी तथा भैरव लाल दास मंच पर मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरूआत मंगलाचरण नृत्य की प्रस्तुती के साथ किया गया जिसमें संस्थान की छात्राओं सुश्री बन्दी एवं सुश्री मेधा झा ने प्रस्तुती दी। उसके बाद सृष्टि फाउण्डेशन के द्वारा दुर्गा स्तुति प्रस्तुत किया गया। उद्घाटन समारोह के बाद जिला पदाधिकारी-सह-निदेशक, मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी द्वारा महाकवि विद्यापति का माल्यार्पण किया गया।

 

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि महाकवि विद्यापति भक्ति रस एवं श्रृंगार रस के बहुत ही विद्वान कवि थे। उनके भक्ति में इतनी शक्ति थी कि स्वयं भगवान शंकर को उगना के रूप में यहां आना पड़ा। उन्होंने विद्यापति की रचना कीर्ति लता एवं कीर्ति पताका का भी उल्लेख किया। उन्होंने चैतन्य महाप्रभु के बारे में भी अपने विचार व्यक्त किया। उन्होंनें संस्थान में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से कहा कि कोई भी काम इतनी लगन एवं मेहनत से करना चाहिए कि उन्हें वह मुकाम हासिल हो जाए। नृत्य प्रस्तुत करती कलाकार

उन्होंने कहा कि राधा का जिक्र सभी करते हैं मगर राधा का आगमन साहित्य में कब हुआ ये कोई नहीं जानता। उन्होंनें बताया कि राधा का आगमन 12वी शताब्दी में हुआ था। उन्होंनें छात्र-छात्राओं से कई प्रश्न भी किया। उन्होंने कहा कि मिथिला पेंटिंग के लिए साहित्य का ज्ञान बहुत जरूरी है और साहित्य का अध्ययन होना चाहिए। उन्होंने अपने भाषण में डबल्यूजी आर्चर एवं गियर्सन का भी जिक्र किया। उन्होंने कवि विद्यापति की रचनाओं को सहेजने एवं उनको प्रसारित करने में डबल्यूजी आर्चर एवं गियर्सन की अहम भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महाकवि विद्यापति की गिनती ऐसे ही महाकवि के रूप में नहीं की जाती है।

 

उन्होंने कहा कि मीराबाई, तुलसीदास, सूरदास आदि सभी विद्यापति से प्रभावित थे। उन्होंनें कहा कि विद्यापति दुख, सुख, विरह, प्रेम, प्रकृति, भक्ति आदि सभी भाव में बसते थे और इन सभी से संबंधित रचनाएं, गीत उन्होंने लिखा है। कार्यक्रम में संस्थान के छात्र-छात्राओं ने भी अपनी प्रस्तुती दी। कार्यक्रम के दूसरे चरण में राजनीति रंजन, मधुबनी द्वारा गायन एवं श्रीमती सलोनी मल्लिक एवं सृष्टि फाउण्डेशन द्वारा नृत्य प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में संस्थान में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं सुश्री बन्दी कुमारी, पूजा कुमारी, काजल कुमारी, सुरभि कुमारी, नेहा कुमारी, अंजली कुमारी, कल्पना कुमारी, मुनकी कुमारी, साक्षी कुमारी, मेधा झा एवं श्री मनोज कुमार झा आदि ने गायन एवं नृत्य प्रस्तुत किया।

 

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