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वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान मखाना किसानों से मिले राहुल गांधी, तालाब में घुसकर जानी समस्याएं।

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी अपनी ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ के दौरान शनिवार को कटिहार में मखाना किसानों से उनके खेतों में जाकर मिले. इस दौरान राहुल गांधी किसानों के साथ तालाब में उतरे और उनसे बातचीत भी की. गौरतलब है कि मखाना उत्पादन में बिहार का महत्वपूर्ण योगदान है. भारत के कुल मखाना का लगभग 80 प्रतिशत यहीं पैदा होता है.

उचित दाम दिलाने पर हुई चर्चा

इसी को लेकर बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि बिहार में कई अलग-अलग मुद्दे हैं. हमारे नेता ने बड़े पैमाने पर मखाना उत्पादक किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने की कोशिश की. यह समझना जरूरी है कि बिहार के किसान बिचौलियों से घिरे हुए हैं. केंद्र सरकार बेहतर प्रबंधन के लिए कुछ नहीं कर रही है, खासकर मछुआरों के लिए. किसानों को उनके मखाने की उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है. इस मुद्दे पर चर्चा हुई.

उत्पादन में आगे, बाजार में पिछड़ा

दरअसल, भारत में मखाने का सबसे बड़ा उत्पादक बिहार ही है, मगर फिर भी मखाने के बाजार में बिहार पिछड़ा हुआ है. देश के कुल मखाना उत्पादन का करीब 80 फीसदी हिस्सा बिहार से मिलता है, बावजूद इसके भी मखाने के सबसे बड़े निर्यातक असम और पंजाब जैसे राज्य हैं, ना कि बिहार. जबकि पंजाब तो मखाना उगाता भी नहीं है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि बिहार में बेहतर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नहीं हैं और ना ही निर्यात के लिए कोई ढांचा है. यही वजह है कि बिहार के मखाना किसान इतना पिछड़े हैं.

‘नीतीश के लिए ये आखिरी चुनाव’

इससे पहले, शुक्रवार को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव, जो भागलपुर में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में राहुल के साथ देखे गए थे, उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए आखिरी चुनाव होंगे, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नीतीश फिर से सीएम के रूप में वापस नहीं आएंगे. तेजस्वी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आखिरी चुनाव होगा. वह दोबारा बिहार के मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे… क्या आपको असली मुख्यमंत्री चाहिए या डुप्लिकेट? हम सभी को एकजुट होकर बदलाव के लिए वोट करना होगा.

20 जिलों में 1,300 किलोमीटर की यात्रा

बता दें कि 16 दिनों की इस यात्रा का उद्देश्य मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना है, जिसे विपक्षी नेताओं ने वोट चोरी का मामला बताया है. 20 जिलों में 1,300 किलोमीटर से ज़्यादा की दूरी तय करने वाली यह यात्रा 1 सितंबर को पटना में समाप्त होगी.

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