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दरभंगा में जलस्तर बढ़ने से डाइवर्जन बहा:नाव के सहारे बाइक लेकर आना-जाना कर रहे लोग, प्रखंड मुख्यालय से संपर्क टूटा।

दरभंगा के कुशेश्वरस्थान प्रखंड के सोहरबा घाट पर पुल निर्माण काम ठप है। इससे स्थानीय लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले कई सालों से पुल निर्माण अधर में लटका हुआ है। ऐसे में लोग डाइवर्जन के सहारे नदी पार करते थे, लेकिन कमला बलान नदी में जलस्तर बढ़ने से डाइवर्जन बह गया और अब लोगों के पास नाव ही एकमात्र सहारा बचा है।

स्थिति ऐसी है कि बाइक, साइकिल और रोजाना आवाजाही करने वाले लोग नाव पर ही अपनी गाड़ियां लादकर नदी पार करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोग जान जोखिम में डालकर रोजाना इसी तरह सफर कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साल 2021 में सोहरबा घाट पर नए पुल निर्माण की घोषणा की थी। लेकिन, तीन साल गुजर जाने के बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया। इस बीच भारी ट्रक की वजह से पुराना पुल भी दो साल पहले ध्वस्त हो गया। इसके बाद से सात पंचायतों के हजारों लोग सीधे प्रभावित हैं। प्रखंड मुख्यालय से उनका संपर्क लगभग टूट चुका है।

नदी में पानी बढ़ने के बाद अंचल प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए तीन सरकारी नावों की व्यवस्था की है। बावजूद इसके, इससे समस्या दूर नहीं हो रही। लोगों को न सिर्फ भय के माहौल में सफर करना पड़ रहा है, बल्कि अतिरिक्त दूरी तय कर बसौल घाट होकर भी अपने गंतव्य तक जाना पड़ रहा है।

रोजाना नाव से जाते स्कूल

बबलू दास सरकारी शिक्षक ने बताया कि वे रोजाना नाव से स्कूल जाते हैं। पिछले साल नाव डूबने से उनकी बाइक नदी में समा गई थी। ग्रामीणों की मदद से काफी मशक्कत के बाद बाइक को निकाला गया। उनका कहना है कि हर रोज नाव पर बाइक लादकर पार करना भयावह लगता है।

संजय कुमार ने कहा कि पहली बार बाइक के साथ नाव पर सफर करना पड़ा। यह बेहद डरावना अनुभव रहा। स्थानीय लोगों को तो रोजाना इसी खतरे से गुजरना पड़ता है। जनप्रतिनिधियों को जल्द समाधान निकालना चाहिए।

पंचायतों का सड़क संपर्क पूरी तरह प्रभावित

विनोद कुमार (RTI एक्टिविस्ट) ने बताया कि सतीघाट-राजघाट मुख्य रास्ते पर सहोरबा घाट का पुल बेहद महत्वपूर्ण है। पुराना पुल ध्वस्त होने और नया निर्माण अधर में लटके रहने से सात पंचायतों का सड़क संपर्क पूरी तरह प्रभावित है। बच्चों की पढ़ाई, किसानों और व्यवसायियों का कामकाज बाधित है। लेकिन प्रशासन और सरकार की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं दिख रही।

इस स्थिति से दक्षिणी इलाके की सात पंचायतें — हरौली, बड़गांव, गोठानी, बरना, पकाही झझरा, चिगरी सिमराहा और दिनमो सीधे तौर पर प्रभावित हैं। व्यवसायियों ने कुछ दिन पहले आपसी सहयोग से डाइवर्जन को मोटरेबल बनाया था, लेकिन पानी चढ़ते ही वह बह गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक नया पुल तैयार नहीं होता, तब तक हर साल इसी तरह की परेशानी झेलनी पड़ेगी। उनका सवाल है कि आखिर कब तक वे जान जोखिम में डालकर नाव पर निर्भर रहेंगे।

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