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राजमिस्त्री की बेटी पहनेगी बिहार पुलिस की वर्दी, कुछ खास है रागिनी की कहानी।

2899 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में लिया था हिस्सा:गृह रक्षक परीक्षा में कुल 2899 अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया था, जिसमें 672 महिला और लगभग 2200 पुरुष उम्मीदवार शामिल थे. शारीरिक दक्षता परीक्षा 26 मई से 29 मई तक आयोजित की गई थी. जिसमें जिलेभर से उम्मीदवारों ने भाग लिया था.

राजमिस्त्री की बेटी पहनेगी बिहार पुलिस की वर्दी 

गांव में खुशी का माहौल:चार दिनों तक चले इस परीक्षण में दौड़, ऊंचाई, वजन और अन्य शारीरिक मानकों की जांच की गई. परीक्षा की मेरिट लिस्ट 26 जून को जारी की गई थी. जिसमें रागनी का नाम शीर्ष पर देखकर उनके परिजन और गांव वाले गर्व से झूम उठे.

रागिनी के पिता हैं राजमिस्त्री:बता दें कि रागिनी कुमारी के पिता रामप्रवेश राम पेशे से राजमिस्त्री हैं, जबकि मां अनीता देवी गृहिणी हैं. मां- बाप ने अपनी गरीबी मिटाने के लिए बेटी को पटना भेजा, ताकि वो अपना और अपने परिवार का भविष्य संवार सके.

रागिनी के मां-पिता ने बेटी को खिलाई मिठाई

शिवहर से पूरी हुई पढ़ाई:छात्रा रागिनी कुमारी ने बताया कि मेरी शिक्षा शिवहर से हुई है. मैंने मैट्रिक इंटर गर्ल्स हाईस्कूल से किया है, जबकि कोचिंग की तैयारी सरस्वती अध्ययन केंद्र से की है, जहां उन्हें समर्पित मार्गदर्शन और प्रेरणा मिली.

”बहुत अच्छा लग रहा है कि मैंने इतना करके दिखाया है. अब मेरा सपना बिहार दरोगा बनने का है. मेरी सफलता में मेरे मां-बाप के अलावा मेरे शिक्षक अब्दुल कादिर, अजीत कुमार और मनीष कुमार का बहुत योगदान है. रोज सुबह चार बजे उठकर दौड़ लगाना और संतुलित खानपान के साथ खुद को तैयार करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा रहा है”. – रागिनी कुमारी, छात्रा

2 महीने की कड़ी मेहनत:रागिनी ने बताया कि मैंने फिजिकल के लिए 2 महीने तक निरंतर प्रयास किया और पहले प्रयास में सफलता मिली. मुझे 15 में 15, पूरे नंबर मिले हैं. शुरू से ही विश्वास था कि मेरी यह परीक्षा जरूर निकलेगी. मुझे घर के काम और संगीत सुनना बहुत पसंद है. अब बेटी वर्दी पहनेगी, यह खबर सुनकर रागिनी के माता-पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े. उन्होंने बेटी रागिनी को गले लगा लिया और कहा कि बेटियां बेटों से कम नहीं है.

परीक्षा परिणाम के बाद भावुक हो गई रागिनी 

”बेटी को सफलता मिलने पर बहुत अच्छा लग रहा है. मैं बेटी को आशीर्वाद देती हूं कि वो हमेशा आगे बढ़े. ये हमारी बेटी नहीं बल्कि बेटा है. आज मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है”.अनीता देवीरागिनी की मां

क्या बोले रागिनी के शिक्षक?:रागिनी के शिक्षक अब्दुल कादिर ने बताया कि जब छोटे परिवार के बच्चे आगे जाते हैं तो बहुत खुशी होती है, क्योंकि यह माहौल किसी पैसे से नहीं, बल्कि मेहनत के बदौलत ही होता है.

”मुझे तो यह चमत्कार सा लग रहा है. मेरी बेटी ने हमारा जीवन ही बदल दिया है. गांव में मेरी पहली बेटी है, जो पुलिस में गई है”. – रामप्रवेश रामरागिनी के पिता

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