Thursday, June 25, 2026
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रामनवमी पर सहरसा में दिखी साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल।

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सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर में रामनवमी के अवसर पर धार्मिक सौहार्द और भाईचारे की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली। माँ कात्यायनी दरबार से निकली भव्य शोभायात्रा का मुस्लिम समुदाय के लोगों ने दिल खोलकर स्वागत किया और रामभक्तों की सेवा कर एकता और आपसी सम्मान का संदेश दिया।

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टोपी पहन मुस्लिम युवाओं ने किया रामभक्तों का स्वागत

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नगर परिषद सभापति प्रतिनिधि हस्सान आलम ने टोपी पहनकर अपने साथियों संग शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का रानीहाट चौक पर शरबत और पानी पिलाकर स्वागत किया। इसके लिए एक विशेष स्टॉल लगाया गया, जिसमें मुस्लिम समुदाय के युवाओं और बुजुर्गों ने भाग लिया।

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‘धर्म कोई भी हो, हम सब एक हैं’

शोभायात्रा बनमा-इटहरी से आरंभ होकर पहाड़पुर और रंगिनिया होते हुए नगर परिषद क्षेत्र के रानीहाट पहुंची। वहां का दृश्य भावुक करने वाला था। रामभक्त गुड्डू भगत ने कहा, “यह देखकर दिल खुश हो गया। यह साबित करता है कि धर्म कोई भी हो, इंसानियत सबसे ऊपर है। हम सब एक हैं।”

हर साल निभाते हैं भाईचारे की भूमिका

शरबत वितरण की व्यवस्था संभाल रहे तौराब हसन ने कहा कि वे हर साल ऐसे आयोजनों में भाग लेते हैं। उनका उद्देश्य समाज में भाईचारे और एकता का वातावरण बनाना है। “हमारा मजहब मोहब्बत और इंसानियत की तालीम देता है,” उन्होंने कहा।

स्थानीय लोगों ने की पहल की सराहना

स्थानीय नागरिकों ने इस पहल को समाज को जोड़ने वाला कदम बताया। रानीहाट चौक पर बना यह दृश्य लोगों को यह याद दिलाता है कि सच्चा धर्म प्रेम, सेवा और आपसी सम्मान में निहित होता है।

रामनवमी पर सिमरी बख्तियारपुर से उठी यह मिसाल न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन सकती है। जब धर्म की दीवारें गिरें और दिल मिलें, तब ही सच्चे ‘रामराज्य’ की कल्पना साकार होती है।

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