6 माह से खराब है ऑक्सीजन प्लांट, फंड भी है, पर ठीक कराने की ही अनुमति नहीं
तीन-तीन प्लांट होने के बावजूद सदर अस्पताल में प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपये का ऑक्सीजन खरीदना पड़ रहा है। कोरोना काल में पीएम केयर फंड से सदर अस्पताल में एक करोड़ की लागत से ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था। इसी तरह एचयूआरएल के सीआरएस फंड से दो छोटा ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था। इसमें से एक प्लांट कभी चालू ही नहीं हुआ, दूसरे से आईसीयू में ऑक्सीजन का सप्लाई हो रहा है जबकि ऑक्सीजन बनाने वाला जो बड़ा प्लांट हैं वह पिछले छह महीने से भी अधिक समय से खराब पड़ा है।
इस प्लांट का कंप्रेसर मशीन के साथ अन्य तरह की खराबी आ गई है, जिसे ठीक कराने में 16 लाख रुपए लगेगें। वही सदर अस्पताल प्रशासन को आक्सीजन खरीददारी में प्रत्येक माह औसतन पचास हजार रुपए खर्च करना पर रहा है। प्लांट को ठीक कराने का लेकर नवंबर माह में कमिश्नर के निरीक्षण के दौरान ऑक्सीजन प्लांट को ठीक कराए जाने को लेकर निर्देश दिया गया था। इस निर्देश के दो महीने से भी अधिक हो चुके हैं सदर अस्पताल प्रशासन को राज्य स्वास्थ्य समिति से आदेश नहीं मिला है।
पोस्टमार्टम कक्ष के पास लगा यह ऑक्सीजन प्लांट कभी चालू ही नहीं हुआ अधिकारियों की माने तो शुद्धता के दृष्टिकोण से बड़ा प्लांट मरीजों के लिए उचित नहीं है। उक्त प्लांट से 90 से 95 फीसदी ऑक्सीजन ही शुद्ध निकल रहा है। इसकी वजह से मरीजों के लिए यह ऑक्सीजन उपयुक्त नहीं है। पिछले छह माह पहले से इस प्लांट से अशुद्ध ऑक्सीजन मिलने के बाद अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से निपटने के लिए आईसीयू के निकट लगे छोटा प्लांट को किसी तरह चालू किया गया है, जिससे आईसीयू में तो ऑक्सीजन आपूर्ति हो रही है।
लेकिन सामान्य वार्ड, सर्जिकल वार्ड, ऑपरेशन थिएटर सहित अन्य स्थानों पर ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए सदर अस्पताल प्रशासन को अन्य एजेंसी से ऑक्सीजन का सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार 10 सिलिंडर से भी ज्यादा प्रतिदिन आक्सीजन की खरीदारी करनी पड़ रही है। बता दें कि हर्ल द्वारा कोरोना के दौरान लगाये गए दो में से एक ऑक्सीजन प्लांट को पिछले सप्ताह चेरियाबरियारपुर के एपीएसी में लगाया गया है। हालांकि पोस्टमार्टम कक्ष के पास लगा यह ऑक्सीजन प्लांट कभी चालू ही नहीं हुआ था।





