सहरसा: बस डिपो का भवन जर्जर, दहशत में कर्मी:सहरसा में कर्मियों को बुनियादी सुविधाएं नदारद, यात्रियों के लिए पानी की व्यवस्था नहीं
बिहार राज्य पथ परिवहन निगम सहरसा बस स्टैंड के कर्मी इन दिनों खौफ के साए में ड्यूटी करने को विवश है। बस डिपो में कार्यरत कर्मी से लेकर आम यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।
बस डिपो से पटना, मुजफ्फरपुर,दरभंगा,हाजीपुर वीरपुर समेत कई अन्य जगहों के लिए बस सेवा संचालित होती है। इसका बस डिपो का निर्माण साल 1982 में हुआ था। करीब तीन एकड़ में फैले बस डिपो कार्यालय में एक दर्जन कर्मी काम करते हैं। लेकिन, कार्यालय का एक कमरे का भवन जर्जर हो चूका है।
सरकारी बस स्टैंड में कार्यरत एक दर्जन कर्मियों ने जिला प्रशासन से लेकर राज्य मुख्यालय को पत्राचार कर चुके है। बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया है। आश्वासन के भरोसे काम में लगे है। सहरसा नगर निगम में बिहार राज्य पथ परिवहन निगम सहरसा का बस डिपो स्थित है।
कार्यालय की स्थिति खराब है।
डर में साए में ड्यूटी करते है कर्मी
काम करने वाले कर्मी डर में साए में ड्यूटी करते है। कार्यालय में मौजूद अकाउंटेंट आनंद मिश्रा ,जूनियर अकाउंटेंट पंकज कुमार, क्लर्क संजीव कुमार एनाउंसर भोला दास, मैकेनिक मोहम्मद इकबाल समेत अन्य ने बताया कि यहां वो कई सालों से काम कर रहे हैं। कार्यालय का एक ही कमरा में सारे चीजों का संचालन किया जा रहा है।
भवन जर्जर स्थिति में है।
भवन इतनी जर्जर हो चुका है कि छत का प्लास्टर कभी भी धराशायी होकर टूट कर गिरता रहता है। लेकिन, मजबूरन भवन के अंदर ही काम करना पड़ता है। लोगों ने कहा कि डर के साए में हम लोग को कार्य करना विवशता बनी हुई है। इसके लिए विभाग को पत्राचार भी कई बार किया जा चुका है। लेकिन सिर्फ आश्वासन का भरोसा मिला है। उन्होंने बताया कि एक तो यात्रियों के लिए बस डिपो में कोई भी सुविधा बहाल नहीं किया जा सका है।
प्रत्येक दिन 60 हजार रुपए की बिक्री
बस डिपो से प्रत्येक दिन 60 हजार रुपए का टिकट की बिक्री होती है। महीने का 18 लाख राजस्व प्राप्त होता है। लेकिन यात्रियों को सुविधाएं के ख्याल से ना तो परिसर में शौचालय है और ना ही शुद्ध पेयजल की कोई इंतजाम किये गए है।
