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दरभंगा : लोहे के गार्डर से खड़ा हो गया दरभंगा एयरपोर्ट, ऐसे देश भर में फैल रहा प्रीफैब्रिकेशन कंस्ट्रक्शन का कारोबार

लोहे के गार्डर से खड़ा हो गया दरभंगा एयरपोर्ट, ऐसे देश भर में फैल रहा प्रीफैब्रिकेशन कंस्ट्रक्शन का कारोबार
आप अपने आस-पास अक्सर यह नोटिस करते होंगे कि एक 5 मंजिला घर बनाने में एक साल या उससे अधिक का समय लग जाता है. लेकिन आज हम जिस तकनीक के बारे में बताने वाले हैं. उसका नाम प्रीफैब्रिकेशन कंस्ट्रक्शन है. चलिए डिटेल में कारोबार और उसके फ्यूचर के बारे में जानते हैं.

लोहे के गार्डर से खड़ा हो गया दरभंगा एयरपोर्ट, ऐसे देश भर में फैल रहा प्रीफैब्रिकेशन कंस्ट्रक्शन का काम
समय बदल रहा है, और इस बदलाव के चलते लोगों के पास समय ही कम पड़ रहा है. ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती उन प्रोजेक्ट्स को कम समय में पूरा करने की है, जिसमें 6 महीना से लेकर साल-दो साल तक का टाइम लगता है. हम जिस काम की बात कर रहे हैं, वह कंस्ट्रक्शन से जुड़ा हुआ है. आप अपने आस-पास अक्सर यह नोटिस करते होंगे कि एक 5 मंजिला घर बनाने में एक साल या उससे अधिक का समय लग जाता है. लेकिन आज हम जिस तकनीक के बारे में बताने वाले हैं. उसका नाम प्रीफैब्रिकेशन कंस्ट्रक्शन है.

इस सेक्टर में हीरो बन रहा इंडिया
भारत में प्रीफैब्रिकेटेड कंस्ट्रक्शन उद्योग के आने वाले वर्षों में लगातार बढ़ने की उम्मीद है, जो देश के बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वजह से है. इस सेक्टर का मार्केट साइज 2024 के अंत तक 1,146 बिलियन रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है, जो 14.4% की दर से बढ़ेगा. याहू फाइनेंस की रिपोर्ट कहती है कि प्रीफैब्रिकेटेड निर्माण उद्योग के 2024 और 2028 के बीच 13.5% की CAGR से बढ़ने की उम्मीद है. प्रीफैब निर्माण भारत के बुनियादी ढांचे को तेज़ी से और टिकाऊ रूप से विकसित करने में मदद कर सकता है. यह स्वच्छता में सुधार, शैक्षिक और स्वास्थ्य सुविधाओं की डिलीवरी में तेज़ी लाने और बहुत कुछ करने में भी मदद कर सकता है.

कैसे काम करता है प्रीफैब्रिकेटेड कंस्ट्रक्शन?
इस तरह के कंस्ट्रक्शन में आधा से अधिक काम फैक्ट्री में ही पूरा हो जाता है. प्रीफैब्रिकेटेड के क्षेत्र में काम कर रही कंपनी ईपैक प्रीफैब के एक्जिक्टिव डायरेक्टर निखिल बोथरा कहते हैं कि इस तकनीक से कंस्ट्रक्शन का 90% का फैक्ट्री में पूरा हो जाता है. फील्ड पर सिर्फ नट-बोल्टिंग का काम किया जाता है. वह कहते हैं कि इस सेक्टर में अभी असली ग्रोथ आना बाकी है. यही वजह है कि वित्तीय वर्ष 23 की तुलना वित्तीय वर्ष 24 में कंपनी के ऑर्डर बुक में 48 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जो 1233 करोड़ रुपए पर है. वित्तीय वर्ष-25 में ईपैक प्रीफैब को ओद्यौगिक, संस्थागत, मल्टीस्टोरी इमारतों, वेयरहाउसिंग एवं एयरपोर्ट्स आदि सेक्टरों से 35 फीसदी अधिक ऑर्डर मिलने की उम्मीद है. वह कहते हैं कि उनकी कंपनी ने दरभंगा एयरपोर्ट का काम समय से पहले पूरा कर दे दिया है. उस एयरपोर्ट को प्रीफैब्रिकेटेड तकनीक से ही तैयार किया गया है.

कोविड के बाद आई तेजी
कोविड के बाद कैपेक्स साइकल और मैन्युफैक्चरिंग एवं ओद्यौगिक विकास के मद्देनज़र ईपैक प्रीफैब अप्रत्याशित दर से विकसित हो रही है. वर्तमान में एविऐशन, वेयरहाउस, ऑटोमोबाइल, कोल्ड-स्टोरेज, डेटा सेंटर और अन्य मैनुफैक्चरिंग उद्योगों से पीईबी की मांग बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि हम कमर्शियल स्पेस, अस्पताल, होटल, स्टेडियम और स्कूल जैसे सेक्टरों में महत्वपूर्ण परियोजनाओं में योगदान दे रहे हैं.

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