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वर्ग में 75% छात्रोपस्थिति अनिवार्य, विभाग की ओर से छात्र- छात्राओं को मिलेगी नियमानुकूल शिक्षा, मार्गदर्शन एवं सुविधाएं: डॉ० घनश्याम।

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग के तत्वावधान में पीजी प्रथम सेमेस्टर, सत्र 2023- 25 में नव नामांकित छात्र- छात्राओं के इंडक्शन कार्यक्रम विभाग में आयोजित किया गया।विभागाध्यक्ष डा घनश्याम महतो की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में विभागीय प्राध्यापक डा आर एन चौरसिया, डा ममता स्नेही तथा डा मोना शर्मा, अनौपचारिक संस्कृत- शिक्षक अमित कुमार झा, एसआरएफ सदानंद विश्वास, जेआरएफ मणि पुष्पक घोष, नीरज कुमार सिंह, रितु कुमारी एवं सोनाली मंडल तथा शोधार्थी बाल कृष्ण कुमार सिंह आदि ने विचार रखें।

अध्यक्षीय संबोधन में डा घनश्याम महतो ने कहा कि शिक्षा सभी सफलताओं की कूंजी है जो मूल पुस्तकों के अध्ययन, शिक्षकों के समुचित मार्गदर्शन एवं सतत अभ्यास से ही आती है। संस्कृत के छात्र- छात्राएं बहुत सौभाग्यशाली होते हैं, क्योंकि वे मानवीय मूल्यों से युक्त शिक्षा प्राप्त करते हैं। विश्व के तमाम ज्ञान- विज्ञान संस्कृत- साहित्य में उपलब्ध हैं। इसमें नौकरी एवं रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि वर्ग में 75% छात्रोपस्थिति अनिवार्य है। छात्रों को विभाग की ओर से सभी नियमानुकुल शिक्षा, मार्गदर्शन एवं सुविधाएं दी जाएंगी।

डा घनश्याम ने कहा कि पीजी में नामांकित छात्र विभिन्न कॉलेजों, स्थलों एवं वातावरणों से आते हैं, जिन्हें विश्वविद्यालय के वातावरण में ढलना आवश्यक है। छात्रों के पीजी में अध्ययन के कई उद्देश्य होते हैं, जिनकी पूर्ति के लिए विभाग उपयुक्त वातावरण प्रदान करता है। विभाग में छात्रों के लिए गीता पर आधारित निःशुल्क नैतिक मूल्य वर्धन हेतु कोर्स भी संचालित है, जिसमें सभी छात्रों का नामांकन अनिवार्य है। सभी छात्र विश्वविद्यालय के पुस्तकालय तथा एडवांस्ड रिसर्च सेन्टर का सदस्य बनाकर वहा नियमित अध्ययन हेतु अवश्य जाएं।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ आर एन चौरसिया ने विषय प्रवेश करते हुए छात्रों का आह्वान किया कि वे न केवल शैक्षणिक, बल्कि सामाजिक आदि सभी दायित्वों का भी बखूबी निर्वहन करें। उन्होंने संस्कृत को कामधेनु विद्या की संज्ञा देते हुए प्रसन्नता व्यक्त किया कि संस्कृत के छात्र अपनी मेहनत एवं शिक्षकों के मार्गदर्शन से हर वर्ष नेट एवं जेआरएफ में सफल हो रहे हैं। डा चौरसिया ने बताया कि चारों आश्रमों में ब्रह्मचर्याश्रम चरित्र- निर्माण एवं व्यक्तित्व- विकास का काल होता है, जिसमें छात्र विद्या एवं बल का अर्जण करते हैं। वे इंडक्शन कार्यक्रम के महत्त्व की चर्चा करते हुए कहा कि इससे आपसी गेट- टूगेदर होता है तथा छात्र एक- दूसरे से परिचित होकर सहज हो जाते हैं। 5 अगस्त, 1972 को स्थापित मिथिला विश्वविद्यालय में संस्कृत पीजी की पढ़ाई 1977 ईस्वी से प्रारंभ हुई।

डा मोना शर्मा ने चालू सीबीसीएस सिलेबस की विस्तृत जानकारी देते हुए छात्रों से कहा कि सुरभारति संस्कृत भारत की विरासत की रक्षक भाषा है। संस्कृत अक्षुण्ण भाषा है, क्योंकि इसमें सामाजिकता, आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिकता है। आज पश्चिम और विकसित देश संस्कृत में वैज्ञानिक तत्त्वों खोज कर रहे हैं।

विभागीय प्राध्यापिका डा ममता स्नेही के द्वारा छात्रों को परीक्षा- पद्धति की जानकारी देते हुए छात्रों को नेट/ जेआरएफ की तैयारी में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने 30 अंकों की आंतरिक परीक्षा तथा 70 अंकों की विश्वविद्यालय परीक्षा की विस्तार से जानकारी दी तथा शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मियों के साथ ही छात्र- छात्राओं का भी आपसी परिचय भी कराया गया।

प्रश्नोत्तर सत्र में देव कुमार झा, ज्योति कुमारी, राजीव कुमार, प्रहलाद कुमार तथा सुजीत ठाकुर आदि छात्र- छात्राओं द्वारा पूछे गए अनेक प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर शिक्षकों द्वारा दिए गए। दीक्षारंभ कार्यक्रम में अनौपचारिक संस्कृत- शिक्षक अमित कुमार झा ने धारा प्रवाह संस्कृत में बातचीत एवं व्याकरण की जानकारी के लिए 10 अक्टूबर, 2023 तक विस्तारित अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण कोर्स में नामांकन लेने की जानकारी दी और बताया कि इस कोर्स में ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यम से पढ़ाई होगी। कोई भी दसवीं पास छात्र या अभिभावक इस कोर्स में ₹1200 देकर ऑनलाइन नामांकन ले सकते हैं। उन्हें 2000 रुपए मूल्य की पांच संस्कृत- पुस्तक दी जाएगी तथा परीक्षोतीर्ण होने के बाद केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली का प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा।

कार्यक्रम में मिहिर कुमार झा, जिगनेश कुमार, मणि शंकर राय, राजीव कुमार, प्रत्युष झा, प्रविन्द्र कुमार, आकाश कुमार, अजय कुमार महतो, ए के सिंह, अशोक कुमार, श्रुति सुमन, माधवी कुमारी, ज्योति कुमारी, सुभद्रा कुमारी, सपना कुमारी, मंजू अकेला, विद्यासागर भारती, योगेन्द्र पासवान, उदय कुमार उदेश आदि उपस्थित थे।

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