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जर्जर सड़क, जलजमाव व स्ट्रीट लाइट की कमी से 20 हजार की आबादी त्रस्त।

सड़क पर भरे गंदे पानी और कीचड़ की वजह से लोग महीनों तक परेशान रहते हैं। कई बार तो पानी इतना भर जाता है कि बच्चों का स्कूल जाना भी रुक जाता है, जिससे उनकी पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित होती है। स्थानीय निवासी कुभेलिया देवी, विनोद मलिक, शिवजी मंडल और नवीन कुमार झा बताते हैं कि इलाके की स्थिति वर्षों से यही बनी हुई है।

 

उनका कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जीतने के बाद जनता से किए गए वादे भूल जाते हैं। सड़क की खराब स्थिति को देखने कोई नेता, जिला प्रशासन या नगर निगम का अधिकारी कभी नहीं पहुंचता। शिकायत करने के बावजूद नहीं हुई सुनवाई: लोगों का कहना है कि यहां की समस्याओं को लेकर कई बार शिकायत दर्ज की गई, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। जर्जर सड़क यहां की सबसे बड़ी समस्या है। वाहन चालक भी इस सड़क पर आने से कतराते हैं। यदि कोई वाहन आता भी है, तो खराब रास्ते का हवाला देकर दोगुना-तिगुना किराया मांगते हैं।

 

सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे, उसमें भरा गंदा पानी और कीचड़ का फैलाव कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकता है। कई लोग पहले भी फिसलकर या वाहन पलटने से घायल हो चुके हैं, लेकिन फिर भी प्रशासनिक स्तर पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। एकादश रुद्र मंदिर में दर्शन करने हर वर्ष हजारों श्रद्धालु, बड़े नेता, हाई कोर्ट के जज और जिला अधिकारी आते हैं।

 

इसके बावजूद सड़क की बदहाली पर किसी का ध्यान नहीं जाता। आगंतुक भी इस मार्ग की दयनीय स्थिति देखकर हैरान रह जाते हैं। नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद यहां की हालत किसी उपेक्षित गांव जैसी लगती है। नगर निगम में शामिल होने का नहीं मिला फायदा: लोगों का कहना है कि नगर निगम बनने के बाद भी कोई विकास कार्य नहीं हुआ, न ही नाला निर्माण पूरा हुआ और न स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की गई।

 

रात होते ही सड़क पूरी तरह अंधेरे में डूब जाती है, जिससे राहगीरों में दुर्घटना का भय बना रहता है। साफ-सफाई की व्यवस्था भी बेहद लचर है। जल निकासी के अभाव में गंदा पानी महीनों तक सड़क पर जमा रहता है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है, लेकिन न तो स्वास्थ्य विभाग और न ही नगर निगम इस दिशा में सक्रिय दिखाई देता है। इलाके के लोगों ने एक स्वर में मांग की है कि सड़क का पुनर्निर्माण, जल निकासी की व्यवस्था, अधूरे नाले का निर्माण और स्ट्रीट लाइट की स्थापना तत्काल की जाए।

 

वार्ड की सड़कों पर जलजमाव से से परेशानी: यहां की सड़कों की खस्ताहाल स्थिति और जल निकासी की व्यवस्था ठप होने से हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। वर्षों से सड़कों की मरम्मत नहीं करवाई गई है, जिसके चलते गड्ढों से भरी गलियों से गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं। कई बार लोग इस रास्ते से आवागमन करते हुए दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं, परंतु नगर निगम प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

 

इसके अलावा घरों के सामने गंदे पानी का जमाव एक गंभीर समस्या बन चुका है। नालियां जाम पड़ी हैं और पानी की निकासी न होने के कारण सड़कों पर कीचड़ फैल चुका है। लोग बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को लेकर चिंतित हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार नगर निगम कार्यालय में शिकायत दर्ज करवाई है, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। वार्डवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं किया गया, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

 

लापरवाही: नल जल योजना का नहीं मिल रहा समुचित लाभ मधुबनी नगर निगम क्षेत्र के अतिथि होटल से लेकर हार्ड हॉस्पिटल होते हुए एकादश रुद्र सात निश्चय योजना के अंतर्गत संचालित नल-जल योजना पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। गर्मी के इन भीषण दिनों में जब लोगों को सबसे ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है, तब इस इलाके के हजारों निवासी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले कई महीनों से नल के माध्यम से जल आपूर्ति पूरी तरह बंद है। पीने के पानी तक की भारी किल्लत हो चुकी है। इलाके में बिछाई गई पाइपलाइन जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है।

 

कहीं से पानी रिसता है, तो कहीं पाइप पूरी तरह जमीन से बाहर निकल चुका है। कई स्थानों पर पाइप की मरम्मत के लिए गड्ढे खोदकर अधूरे छोड़ दिए गए हैं, जिससे लोगों को आने-जाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि योजना शुरू होते वक्त बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन कुछ ही समय में यह व्यवस्था दम तोड़ चुकी है। नगर निगम और संबंधित विभाग की लापरवाही का खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

साफ सफाई की व्यवस्था नहीं होने से समस्या: गली में जगह-जगह गंदा पानी भरा रहता है, कूड़ा-कचरा सड़कों पर बिखरा पड़ा होता है और बदबू से लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। यह स्थिति सिर्फ एक-दो दिन की नहीं, बल्कि महीनों तक बनी रहती है। नगर निगम का दावा है कि नियमित सफाई की जा रही है, लेकिन इस गली में न तो कोई सफाईकर्मी नजर आता है, न ही कूड़ा उठाने की कोई व्यवस्था है। यहां के लोग बार-बार शिकायत करने के बाद भी सिर्फ आश्वासन ही पाते हैं।

बोले जिम्मेदार- शहर के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए नगर निगम द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में विशेष पहल के तहत नाला कार्य को शीघ्र आरंभ करने की योजना बनाई गई है।

 

इस उद्देश्य से संबंधित टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, और कार्य शीघ्र शुरू होने की उम्मीद है। विशेष रूप से अतिथि होटल से लेकर हार्ट हॉस्पिटल होते हुए एकादश रुद्र जाने वाली सड़के लंबे समय से जर्जर है। हर वार्ड में साफ सफाई के लिए कर्मी की नियुक्ति की गई है। शिकायत मिलने पर तुरंत अधिकारी से बात कर वार्ड में साफ सफाई की व्यवस्था कर दी जाती है। -उमेश कुमार भारती नगर आयुक्त मधुबनी।

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