दरभंगा में दर्शनशास्त्र संगोष्ठी:अयाची मिश्र के योगदान पर विद्वानों ने की चर्चा।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के दर्शनशास्त्र विभाग में एक महत्वपूर्ण सिंपोजियम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अयाची मिश्र चेयर और डॉ प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
विभागाध्यक्ष डॉ शिवानंद झा की अध्यक्षता में आयोजित इस सिंपोजियम का विषय था “भारतीय दर्शन में पंडित अयाची मिश्र का योगदान”। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ धीरेन्द्र कुमार पांडे उपस्थित थे।
मुख्य वक्ता ने बताया कि मिथिला दर्शन, यज्ञ और ज्ञान-विज्ञान की भूमि है। उन्होंने पंडित अयाची मिश्र के जीवन पर प्रकाश डाला। अयाची मिश्र के पुत्र शंकर मिश्र ने उनकी 20 कृतियों को मूर्त रूप दिया। अयाची मिश्र ने कभी किसी से दान या पुरस्कार स्वीकार नहीं किया, इसी कारण उनका नाम ‘अयाची’ पड़ा।
डॉ राजीव कुमार ने बताया कि अयाची मिश्र सरिसव-पाही के मूल निवासी थे। उनका वास्तविक नाम भवनाथ मिश्र था। कार्यक्रम में डॉ ममता स्नेही, डॉ मोना शर्मा समेत 60 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सभी प्रतिभागियों को फाउंडेशन की ओर से प्रमाण पत्र दिए गए।
डॉ संजीव कुमार साह ने कहा कि अयाची मिश्र का जीवन अनुकरणीय है। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर और अधिक शोध की आवश्यकता है। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ और अतिथियों का स्वागत पुष्प-पौधों से किया गया।
