छपरा में निःसंतान दंपति को मिला बच्चा:दरभंगा के दंपति ने किया था आवेदन, 6 महीने कानूनी प्रक्रिया के बाद मिली अनुमति।
दरभंगा दंपति के आवेदन पर CARA ने लगाई मुहर
संतान की चाहत में दरभंगा से छपरा पहुंचने वाले एक निःसंतान दंपति की गोद शनिवार को खुशियों से भर गई। सारण जिला प्रशासन की पहल और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद दंपति को एक बालक गोद मिला। जिलाधिकारी अमन समीर ने अपने कार्यालय में गोद लेने की प्रक्रिया पूरी करवाई।
दरभंगा निवासी इस दंपति ने छह महीने पहले केंद्रीय दत्तकग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया था। सामाजिक और कानूनी पहलुओं की गहन जांच के बाद आखिरकार उन्हें दत्तक ग्रहण की मंजूरी मिल गई।
दत्तक ग्रहण इकाई है बेहद खास
सारण की यह दत्तक ग्रहण इकाई समाज कल्याण विभाग के अधीन संचालित होती है। यहां ऐसे बच्चों की देखभाल की जाती है, जिन्हें संरक्षण की आवश्यकता होती है। यहां बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और भोजन जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं दी जाती हैं।
गोद लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, दत्तक ग्रहण के लिए दंपति का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना जरूरी है। साथ ही वैवाहिक जीवन कम से कम दो वर्षों का होना चाहिए। एकल महिला लड़का या लड़की दोनों को गोद ले सकती हैं, जबकि एकल पुरुष सिर्फ लड़के को ही गोद ले सकते हैं। दो संतान वाले दंपति केवल विशेष जरूरतों वाले बच्चों को ही गोद ले सकते हैं।
CARA पोर्टल ही एकमात्र वैध रास्ता
बच्चा गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया केवल carings.wcd.gov.in पोर्टल के माध्यम से ही की जा सकती है। किसी अन्य माध्यम से बच्चा गोद लेना कानूनन अपराध है।
निःसंतान दंपतियों के लिए नई उम्मीद
छपरा में हुई यह पहल उन निःसंतान दंपतियों के लिए एक उम्मीद है, जो मातृत्व और पितृत्व का सुख पाना चाहते हैं। प्रशासन की पारदर्शिता और समर्पण ने यह साबित कर दिया कि सिस्टम सही हो तो जीवन बदल सकता है।
इस खास मौके पर जिला बाल संरक्षण इकाई के प्रभारी सहायक निदेशक राहुल कुमार, बाल संरक्षण पदाधिकारी पंकज प्रसाद, समन्वयक कहकशा रसीद और दीपांशु राज भी मौजूद रहे। सभी की आंखों में उस पल के लिए खुशी और संतोष झलक रहा था।
