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बिहार : नियुक्ति पत्र पर बिहार शिक्षक संघ में घमासान तेज, एक धड़ा कर रहा है इसके खिलाफ झंडा बुलंद कर तो दूसरे ने समर्थन का किया ऐलान

बिहार में नियुक्ति पत्र वितरण को लेकर शिक्षक संघों में विभाजन हो गया है। राज्य सरकार द्वारा सक्षमता परीक्षा उत्तीर्ण शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देने का निर्णय शिक्षकों के बीच भारी विरोध है। कई शिक्षक संघों का मानना है कि सरकार की यह नीति शिक्षकों के साथ विश्वासघात हैं ।

नियुक्ति पत्र पर बिहार शिक्षक संघ में घमासान –
नियुक्ति पत्र वितरण को लेकर शिक्षक संघ में हीं विभेद हो गया है। एक शिक्षक संघ का आरोप है कि सरकार ने शिक्षकों के साथ विश्वासघात किया है। शुरुआत में कहा गया था कि नियोजित शिक्षकों को पूरे जिले में कहीं भी तैनात किया जा सकता है, लेकिन अब सरकार ने 10 अनुमंडलों तक सीमित करने का फैसला लिया है।

 

 

सरकार का कहना है कि नई नियुक्ति से शिक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा और योग्य शिक्षकों को मौका मिलेगा। हालांकि, शिक्षक संघों का मानना है कि सरकार की यह नीति शिक्षकों के हितों के खिलाफ है और इससे शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।यह विवाद न्यायालय में भी पहुंच चुका है। शिक्षक संघों ने सरकार के खिलाफ याचिका दायर की है। न्यायालय इस मामले में अंतिम फैसला सुनाएगा।

वहीं कई शिक्षक संघों ने सरकार के इस निर्णय का विरोध करते हुए शिक्षकों से नियुक्ति पत्र कार्यक्रम का बहिष्कार करने का आग्रह किया है। शिक्षक संघ सरकार की दमनकारी नीति के विरोध में 19 नवंबर को शाम 5 बजे मशाल जुलूस निकालेंगे। यदि सरकार शिक्षकों की मांगों को नहीं मानती है तो शिक्षक संघ विधानमंडल के समक्ष धरना देने की तैयारी कर रहे हैं।

 

वहीं अखिल भारतीय शैक्षिक संघ के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव, शैलेन्द्र कुमार शर्मा उर्फ शैलू ने शिक्षकों की नियुक्ति पत्र प्राप्त करने और राज्यकर्मी का दर्जा पाने की इच्छा पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। शर्मा का मानना है कि जो शिक्षक नियुक्ति पत्र प्राप्त कर राज्यकर्मी का दर्जा चाहते हैं, संघ को उनके मार्ग में कोई बाधा नहीं डालनी चाहिए। इन शिक्षकों का उद्देश्य परीक्षा उत्तीर्ण करके राज्यकर्मी के रूप में बेहतर अवसर प्राप्त करना है।राज्य सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि जो शिक्षक उच्च पदों के लिए पात्रता प्राप्त करेंगे, उनकी नई सेवा शुरू हो जाएगी और पुरानी सेवा समाप्त हो जाएगी। संघ को राज्य सरकार की इस नीति का सम्मान करते हुए शिक्षकों के मार्ग में कोई बाधा नहीं डालनी चाहिए।

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