Friday, July 24, 2026
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मैथिली सीटीईटी में शीघ्र होगी शामिल, एनसीटीई बोर्ड ने की अनुशंसा – डा गोपाल जी ठाकुर

मैथिली को केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल करने की एनसीटीई बोर्ड की पहल ऐतिहासिक कदम – डा गोपाल जी ठाकुर/

सांसद की पहल ने दिखाया रंग, मैथिली भाषा केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा में शीघ्र होगी शामिल/
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मैथिली को केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं जो आने वाले समय में साढ़े आठ करोड़ मैथिलीभाषियों के लिए वरदान साबित होगा। एनसीटीई बोर्ड के द्वारा मैथिली भाषा को केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल करने की अनुशंसा करना यह साबित करता है कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में बिहार केंद्र और राज्य की एनडीए सरकार मिथिलावासियों के समग्र उत्थान के लिए संकल्पित हैं।
भारतीय जनता पार्टी के सांसद सह लोकसभा में पार्टी सचेतक डा गोपाल जी ठाकुर ने मैथिली भाषा को सीटीईटी में शामिल किए जाने के लिए केंद्र सरकार के द्वारा की जा रही प्रयासों तथा पहल के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा है कि सांसद बनने के बाद से ही वे लगातार मैथिली भाषा को सीटीईटी में शामिल कराने के लिए प्रयासरत है तथा एनसीटीई बोर्ड के चेयरपर्सन पंकज अरोड़ा ने उन्हें अधिकारिक रूप से सूचित किया है कि बोर्ड के द्वारा मैथिली भाषा को शामिल किए जाने की अनुशंसा भेज दी गई है तथा सरकार के द्वारा अन्य सभी औपचारिकताओं को पूरा कर मैथिली भाषा को केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा में शीघ्र ही शामिल कर लिया जाएगा।
सांसद डा ठाकुर ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान तथा बिहार के सीएम नीतीश कुमार के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा है वे 2022 से ही इसके लिए लगातार प्रयासरत हैं तथा 13 जनवरी 2022 , 13 मार्च 2023, 25 जून 2023 तथा 6 जून 2024 को इस संबंध में मानव संसाधन मंत्रालय को पत्र के माध्यम से पहल करने का आग्रह किया था तथा लोकसभा में तारांकित प्रश्न के माध्यम से अपनी बात रखी थी। तथा इसी पहल के आलोक में एनसीटीई के सलाहकार्ड बोर्ड तथा क्रियान्वयन समिति ने 29 जून 2024 की सम्पन्न बैठक में एक समिति का गठन किया था जिसका सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर साकार हो रहा है तथा यह भाषा अब केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए माध्यम बन जाएगी।
सांसद डा ठाकुर ने इस संबंध में बोर्ड की अनुशंसा को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि अब सरकार के स्तर पर सभी प्रक्रियाओं को पूरा कर शामिल करने की घोषणा की जाएगी।
सांसद डा ठाकुर ने एनडीए सरकार तथा पीएम मोदी के नेतृत्व में मैथिली भाषा को मिल रहे सम्मान को मिथिला क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है बताते हुए कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेई ने मैथिली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में तथा पीएम मोदी के द्वारा इसे सीबीएसई पाठ्यक्रम में शामिल किया गया जबकि मोदी सरकार के नेतृत्व में ही मैथिली भाषा में संविधान के प्रतियों का विमोचन किया गया तथा राष्ट्रपति भवन तक की अधिकारिक वेबसाइट मैथिली भाषा में प्रस्तुत कर इसे विधाई तथा न्यायिक कार्यों में शामिल किया गया जो ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो रही है।
सांसद डा ठाकुर ने मिथिला के विकास तथा मैथिली भाषा के उत्थान के लिए एनडीए शासन काल की जमकर सराहना करते हुए कहा है कि भाजपा सरकार द्वारा झारखंड में मैथिली भाषा को द्वितीय राजभाषा की मान्यता दी गई जबकि बिहार में कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार ने उर्दू को द्वितीय राजभाषा की मान्य देकर मैथिली भाषा के साथ अन्याय किया था।
सांसद डा ठाकुर ने मैथिली भाषा को देश ही नही वैश्विक स्तर पर एक पूर्ण तथा समृद्ध भाषा बताते हुए कहा कि इसकी अपनी स्वतंत्र लिपि है तथा समृद्ध इतिहास रहा है यही कारण है कि मैथिली भाषा अब देश के हर कोने में बोली जाती है।

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