Saturday, June 13, 2026
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संस्कृत विश्वविद्यालय में 12 दिवसीय आवासीय संस्कृत प्रशिक्षण वर्ग की हुई शुरूआत।

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दरभंगा। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में 12 दिवसीय आवासीय संस्कृत प्रशिक्षण वर्ग की शुरूआत दरबार हॉल में की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय ने कहा कि आज से करीब 40 वर्ष पूर्व चमूकृष्ण शास्त्री ने कुछ संस्कृत छात्रों के साथ इस संस्कृत संभाषण कार्य की शुरूआत की थी, जिसका परिणाम आज देश और विदेशों में दिख रहा है। डॉ. भीमराव अम्बेदकर संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने के पक्षधर थे। हमें संस्कृत शास्त्रों के संरक्षण के साथ साथ संस्कृत संभाषण के अभ्यास पर भी बल देना होगा। सम्भाषण शिविर की महत्ता को स्पष्ट करते हुए कुलपति प्रो. पांडेय ने कहा कि भाषा शिक्षण सरकार द्वारा नहीं किया जा रहा है। यदि संस्कृत संभाषण नहीं होंगे, तो इसे लोग कैसे सुनेंगे और यदि सुनेंगे नहीं तो वे बोलेंगे कैसे। इसलिए इसकी व्यापकता के लिए संभाषण प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना होगा। हाँ, तोता रटंत संस्कृत से संस्कृत व्यवहारिक भाषा नहीं बन सकती है। संस्कृत में सामर्थ्य है, परंतु इसके लिए अभ्यास नहीं हो रहा है। इसलिए भी अभ्यास करने के लिए इस तरह के आवासीय प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन किया जाना आवश्यक है। संस्कृत भारती बिहार न्यास एवं कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग में बिहार एवं झारखण्ड के प्रशिक्षु संस्कृत सीखने के लिए जुटे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत भारती के प्रांत अध्यक्ष प्रो. इन्द्रनाथ झा ने कहा कि विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में संस्कृत पढ़ने के लिए छात्रों को प्रेरित करना चाहिए। इस मौके पर पूर्व कुलपति प्रो. शशिनाथ झा, पूर्व कुलपति प्रो. रामचंद्र झा, प्रो. श्रीप्रकाश पांडेय, डॉ. रमेश कुमार झा, डॉ. शिवलोचन झा, डॉ. दिनेश झा आदि ने विचार रखे। उक्त जानकारी जनसम्पर्क पदाधिकारी निशिकांत प्रसाद सिंह ने दी।

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