अधिवक्ता राजीव रंजन ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित जयंती समारोह में अधिवक्ता अरुण कुमार चौधरी ने कहा कि गोयनका जी का जन्म 3 अप्रैल 1904 को दरभंगा में हुई थी।
वे कारोबार की गुर सिखने के लिए मद्रास चले गये। जहां फ्री प्रेस जर्नल में डिस्पैच भेंडर का काम किया। 1936 में इण्डियन एक्प्रेस की शुरूआत की। स्वतंत्रता आंदोलन में दक्षिण भारत के प्रभार में रहे मद्रास राज्य से देश की पहली संविधान सभा के सदस्य भी थे।
भारत के संविधान पर उनके भी दस्तखत है। अधिवक्ता रमणजी चौधरी ने कहा कि वे 1941 में राष्ट्रीय समाचार पत्र के संपादकों के समेलन में अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
उन्होंने इन्डियन एक्प्रेस के दिल्ली संस्करण के रुप लाँच किया। वे बेंगलौर, मदुरै, अहमदाबाद आदि दर्जनों जगहों से समाचार पत्रों का प्रकाशन किये। उन्होंने 14 संस्करणों के साथ इण्डियन एक्प्रेस को अंग्रेजी भाषा का दैनिक अखबार बना दिया।
वे विभिन्न भारतीय भाषाओं में छ: अन्य समाचार पत्रों का भी प्रकाशन करते थे। अधिवक्ता श्याम बिहारी राय सरस ने कहा कि रामनाथ गोयनका पुरस्कार देश के निष्पक्ष पत्रकार को दिया जाता है।
वे भारत के मिडिया दिग्गज एवं पक्के राष्ट्रवादी थे। स्व. गोयनका के संबंध में कहा जाता है कि वे कहते थे कि अखबार चलाना नेताओं की बस की बात नहीं है। अधिवक्ता उज्ज्वल गोस्वामी और मायाशंकर चौधरी ने कहा कि गोयनका जी का कथन है कि अखबार पूरे देश की चिंता करता है।
अखबार सिर्फ व्यापार का साधन नहीं बल्कि एक मिशन भी है। लोगों की जिंदगी सवारने का जरिया भी है। यदि मिडिया देश को प्ररित करना छोड़ दे तो बदलाव की वेहद कम सम्भावना होगी।
अधिवक्ता कुमार उत्तम ने कहा कि मिडिया ही है जो लोगों को एहसास दिलाती है कि क्या-क्या होना चाहिए। इस अवसर पर अधिवक्ता हीरा नंद मिश्र, संतोष कुमार सिंहा, कुमार उत्तम, श्याम बिहारी राय, सनोज कुमार, सुदर्शन कुमार झा, मनोज कुमार, रामवृक्ष सहनी, सुधीर कुमार चौधरी, अनिल कुमार मिश्र, बुलन कुमार झा, रमाशंकर चौधरी, मुरारी लाल केवट, प्रदीप सांडिल्य, अधिवक्ता लिपिक विनय कुमार झा आदि उपस्थित थे।





