इस दौरान महाविद्यालय की लैंग्वेज लैब की समन्वयक सह इंग्लिश विभाग की शिक्षिका डॉ. रश्मि प्रिया ने कहा कि आधी आबादियों को अधिकार देकर ही भारत 2047 तक बन सकता है विकसित राष्ट्र और विश्वगुरु।
इस बाबत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सबसे पहले मैं धन्यवाद ज्ञापित करना चाहती हूं कि उन्होंने महिला सशक्तिकरण की दिशा में कई अहम फैसला लिया।
वैसे तो महिलाओं को संविधान में बराबर का हक लोकतंत्र स्थापित होने के साथ ही मिल गया लेकिन सरकार ने समय-दर-समय उसमें आवश्यक संशोधन को लाया ताकि हमारी बेटियां मजबूत हो सके।
चाहे वो सीएम नीतीश का पंचायती राज में महिलाओं को 50% आरक्षण की बात हो चाहे पीएम मोदी के द्वारा राज्यसभा, लोकसभा सहित देश के सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिये 1 तिहाई आरक्षण हो।
यह सरकार का दूरगामी फैसला है जिसका सकारात्मक रिजल्ट समाज में परिलक्षित होना शुरू हो गया है और भी कई योजनाएं हैं जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, कन्या उत्थान योजना, बेटियों के लिये प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक मुफ्त शिक्षा मिलना।
जिसका भी असर समाज में परिलक्षित हो रहा है। और लिंगानुपात में काफी सुधार हुआ है। हमारी सनातन संस्कृति भी तो सनातन काल से इसी को परिलक्षित करती आ रही है और यहां मातृशक्ति की पूजा होती है
और उसका पुरुषों से पहले पहला स्थान है:- सीताराम, राधेश्याम, गौड़ीशंकर, लक्ष्मीगणेश न कि रामसीता, श्यामराधे, शंकरगौड़ी, गणेशलक्ष्मी। अब आपलोगों को चाहिये कि अपने अधिकारों के प्रति आपलोग जागरूक हों। समस्याएं कहाँ नहीं है।
राम जब वन के लिये प्रस्थान कर रहे थे तो राम कहलाते थे और जब वन गमन के बाद लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम कहलाये। इसीलिए दवाब में कभी इंसान को बिखरना नहीं बल्कि श्रीराम के जीवन से सीख लेकर निखरना चाहिये।
अंत में मैं बस यही कहना चाहती हूं कि विकासशील देश होते हुए भारत ने महिलाओं के उत्थान के दिशा में जितना काम किया है वो विश्व मानचित्र पर महिलाओं को मजबूती के साथ स्थापित किया है। जिसका सशक्त उदाहरण है कि भारत ने कई विकसित देशों से पहले महिलाओं को वोटिंग का अधिकार दिया है।
इसीलिए आज बस इस मूल मंत्र का संकल्प लीजिये कि एक पत्थर चोट खाकर सड़क का कंकर बनता है और वहीं दूसरा पत्थर चोट सहकर शिवालय का भगवान शंकर बनता है। इसीलिए हमें समस्याओं का राग अलापना नहीं है बल्कि सीमित संसाधन में अपना बेहतर प्रदर्शन करना है। इसीलिए असफल महिलाओं के कहानियों से बचिये और सफल महिलाओं के कहानी को जीवन में आत्मसात करिये कि कैसे वो सीमित संसाधन व तमाम झंझावतों को झेलते हुए आज समाज में अपना नाम रौशन कर रही हैं। अंत में आप सभी को मेरी ओर से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई व स्वर्णिम भविष्य की शुभकामनाएं व मंगलकामनाएं।
इस अवसर पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन भी हुआ जिसमें प्रथम छह स्थान पर वंदना, कशिश, तृष्णा, सानिया परवीन, प्रियंका व नंदिनी को मिला। इस दौरान महाविद्यालय की सभी शिक्षिकाओं व महिला कर्मियों को सम्मानित भी किया गया।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य प्रो. मो. रहमतुल्लाह, राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम पदाधिकारी मुकुल किशोर वर्मा, बर्सर डॉ. शम्से आलम, परीक्षा नियंत्रक डॉ. आलोक प्रभात व सच्चिदानंद मिश्रा समेत सभी शिक्षक, कर्मी रेणुका झा, नमिता चंद्रा व अंशु कुमारी सहित जंतु विज्ञान (प्रतिष्ठा) के द्वितीय वर्ष की छात्रा नैना परिहार, निशु कुमारी, स्वीटी कुमारी, अफीफा आसिफ सिद्दकी, अंजली कुमारी, कशिश कुमारी, वंदना कुमारी व सोनाक्षी समेत सैकड़ों छात्राएं मौजूद थी।





