ग्रामीण रामबहादुर यादव ने बताया कि छह दिनों से उस जगह पर उस वृद्ध को अचेतावस्था में देखा जा रहा था। स्थानीय लोग उसे बुलाने और उसके विषय में अधिक जानकारी के लिए उसके शरीर पर पानी के छींटे व अन्य तरह से छेड़खानी कर रहे थे। इस पर वह कभी-कभार काहे मजाक करते हो जैसी बातें बोलता था। हर समय वह एक ही जगह पर आंखें मूंदे पड़ा रहता था। कभी-कभार स्थानीय महिलाएं खाना-पानी भी दे आती थीं, जिसे वह नहीं के बराबर खा पाता था।
करीब 75 वर्षीय अज्ञात वृद्ध मानसिक रूप से बीमार सा प्रतीत होता था। उसका रंग गोरा था। सिर व दाढ़ी के सफेद छोटे-छोटे बाल थे। उसके शरीर पर काला रंग का शर्ट तथा उजले रंग की गंजी थी। कमर में चेकदार नीले पीले रंग की लुंगी थी। दाहिने पैर में घुटने के नीचे चर्मरोग जैसा निशान दिख रहा था।
इस संबंध में पूछने पर थानाध्यक्ष आशुतोष कुमार झा ने बताया कि डीएमसीएच में लाश को पोस्टमार्टम के बाद 72 घंटे तक सुरक्षित रखा जाएगा ताकि कोई भी परिजन आकर लाश को पहचानने के बाद अपने साथ ले जा सके। समय बीतने के बाद भी परिजन के नहीं पहुंचने पर सरकारी स्तर से मिट्टी कर्म या दाह संस्कार कर दिया जाएगा।





