मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में एकमात्र एजेंडे पर सरकार ने अपनी मुहर लगाई गई. कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले की जानकारीउर्जा मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव ने बिहार विधानसभा में दी. उन्होंने बताया कि लगातार चार सालों से बिजली दलों में कोई वृद्धि नहीं गई थी. पांचवें साल बिहार रेगुलेटरी कमिशन ने बिजली वृद्धि का फैसला दिया था. 1 अप्रैल से नई रेट हो जाती, इसके पहले ही आज सरकार ने बढ़े बिजली दर पर 13 हजार करोड़ की सब्सिडी देने का फैसला लिया है. अब उपभोक्ताओं पर कोई आर्थिक बोझ नहीं होगा.
उर्जा मंत्री ने कहा कि विपक्षी आरोप लगा रहे थे कि सरकार ने बिजली की दरों में बढ़ोतरी कर दी गई है. लेकिन हमारे मुख्यमंत्री ने एक साथ 13 हजार करोड़ की सब्सिडी देने का फैसला लिया है. यह बहुत बड़ा फैसला है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदन मे कहा कि उपभोक्ताओं को अधिक पैसे नहीं लगेंगे. पहले जहां सब्सिडी पर 8895 करोड़ रू दिये जाते थे, लेकिन रेट बढ़ गया है तो अब सरकार सब्सिडी के रूप में 13114 करोड़ की राशि जारी किया है.
सीएम नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा में एक मांग भी रखी और कहा कि वन नेशन वन रेट किया जाना चाहिए. विपक्ष की तरफ इशारा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपलोग ऊपर यह बात रखिए. इस पर प्रतिपक्ष के नेता विजय सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री का फैसला स्वागत योग्य है, लेकिन बिहार सरकार को भी यह बताना चाहिए कि बिहार लंबे अरसे के बाद भी आज बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर क्यों नहीं हो सका है. ऊर्जा मंत्री ने प्रत्युत्तर में कहा कि जिस तरीके से केंद्र सरकार ने अनिवार्य शर्त लगाई है, वैसे में बिहार में चलने वाले पावर प्रोजेक्ट की जिम्मेवारी सरकार ने केंद्र सरकार को सौंपी है.





