बिहार डेस्क: बीजेपी के कार्यकर्ताओं और नेताओं पर हुए पुलिसिया लाठीचार्ज के मामले में पटना पुलिस का बयान सामने आया है. पटना के एसएसपी राजीव मिश्रा ने प्रेसवार्ता कर बताया कि बीजेपी के पास किसी भी प्रकार का परमिशन विधानसभा मार्च करने का पुलिस प्रशासन द्वारा नहीं दिया गया था. मार्च की जानकारी होने की सूचना पर पुलिस एक्टिव हुई और प्रदर्शनकारियों को डाक बंगला चौराहे पर रोका गया, प्रदर्शनकारियों को खूब समझाया गया लेकिन वह नहीं मानें. प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिसकर्मियों की आंखों में लाल मिर्च झोंकी गई. पुलिस द्वारा हल्का बल का इस्तेमाल किया. एसएसपी ने बताया कि पुलिस की लाठीचार्ज से एक शख्स के मृत होने की सूचना मिली जो कि गलत है. वैज्ञानिक साक्ष्यों और सीसीटीवी फूटेज में भी वह अपने साथियों के साथ बातचीत कर रहे थे और स्वस्थ अवस्था में देखे गए.
एसएसपी ने बताया कि गांधी मैदान से छज्जू बाग की तरफ जो रास्ता जाता है उसमें दिख रहा है कि 13:22 बजे मृतक और उनके दो साथी जाते हुए दिख रहे हैं. उसके बाद जिस रिक्शे से उन्हें ले जाया गया वह रिक्शा भी 13: 27 बजे सीसीटीवी में दिख रहा है. मृतक के साथियों द्वारा भी यह बताया गया है कि जिस स्थान पर उन्हें (मृतक को) सीसीटीवी में देखा जा रहा है उसके 50 मीटर आगे एक ट्रांसफॉर्मर लगा हुआ है वहां उन्हें गिरे हुए अवस्था में देखा गया.
बताते चलें कि गुरुवार को बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदर्शन किया गया. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर जमकर लाठियां भांजी. बीजेपी का दावा है कि पुलिसिया लाठीचार्ज की चपेट में आने से जहानाबाद के बीजेपी महामंत्री विजय कुमार सिंह के सिर में चोट लग गयी, उनकी पीएमसीएच में इलाज के दौरान मौत हो गई. आनन-फानन में विजय कुमार सिंह को पहले तो बैंक रोड स्थित तारा नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया लेकिन हालत बिगड़ती देख पीएमसीएच ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
वहीं, बीजेपी के दावों के विपरीत नीतीश सरकार का दावा है कि जहानाबाद के एक व्यक्ति विजय सिंह छज्जूबाग में सड़क किनारे अचेतावस्था में पाए गए थे. उनके शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं है. कुल मिलाकर बिहार की राजनीति में एक बार फिर से भूचाल आ गया है.




