बिहार की राजनीति में बुधवार को अचानक हलचल मच गई। सुबह सुबह ही सीएम नीतीश कुमार राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर से मिलने पहुंचे। सियासी गहमाहमी बढ़ने के बाद खबर आई कि नीतीश कुमार राजभवन स्थित राजेंद्र मण्डपम का निरीक्षण करने पहुंचे थे। लेकिन सीएम के निकलते ही पूर्व डिप्टी सीएम और बीजेपी से राज्यसभा सांसद सुशील मोदी भी राजभवन पहुंच गए।
हालांकि, राजभवन से बाहर निकलने के बाद सुशील मोदी ने मीडिया से बातचीत की और कहा कि ये महज एक संयोग है। इसका कोई और मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए।
मुलाकात के बाद बाहर निकले पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने कहा कि यह संयोग की बात है कि मुझसे पहले सीएम आए थे। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मेरी शिष्टाचार भेंट थी। हम दोनों कॉलेज के दिनों में विद्यार्थी परिषद के सदस्य रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल बेहतर ढंग से विश्वविद्यालयों को चला रहे हैं। उसी की बधाई देने आया था।
सुशील मोदी ने साफ तौर पर कहा कि मेरे आने से पहले सीएम नीतीश कुमार आए थे। ये महज एक संयोग है। इसका दूसरा कोई भी मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षक नियुक्ति संशोधन पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी, उन्होंने कहा कि क्या बिहार में गुणवत्ता वाले बच्चे नहीं हैं। बिहार के बच्चे आईआईटी, मेडिकल में जा रहे हैं। इधर, शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि विज्ञान और गणित के टीचर नहीं मिल रहे हैं।
अंदरखाने से खबर आई की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मिनट तक राजभवन में रहे। इस दौरान उन्होंने राजेंद्र मंडपम का निरीक्षण किया। बताया जाता है कि राजेंद्र मंडप का रिनोवेशन किया जा रहा है। सीएम नीतीश कुमार इसी का निरीक्षण करने पहुंचे थे। सीएम नीतीश कुमार के साथ भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि थे। सीएम नीतीश कुमार ने राजभवन में घूम-घूम कर निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिया। राजभवन के राजेंद्र मंडपम सहित अन्य मरम्मत कार्य का प्रपोजल भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से मांगा है।
आपको बता दें कि राजेन्द्र मण्डपम में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जाता है। राजेंद्र मण्डपम में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान अतिथियों को बैठने में दिक्कत होती थी। इसे दूर करने की कोशिश की जा रही है।




