Wednesday, September 30, 2026
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सी. एम. साइंस कॉलेज में भाषण प्रतियोगिता आयोजित 

सी. एम. साइंस कॉलेज में गुरुवार को ‘आत्मनिर्भर भारत और स्वतंत्रता का नया आयाम’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता, स्वतंत्र चिंतन, अभिव्यक्ति-कौशल, आत्मबोध एवं नेतृत्व क्षमता का विकास करना था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. संजीव कुमार मिश्र ने विद्यार्थियों में प्रश्न करने की प्रवृत्ति और जानने की जिज्ञासा विकसित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचनाओं का संग्रह करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, विवेक और स्वतंत्र चिंतन विकसित करना है। उन्होंने कहा कि जीवन में सीखना जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक समय के साथ कुछ पुरानी धारणाओं को भूलना और उनसे आगे बढ़ना भी है। उन्होंने इस संदर्भ में कहा कि सीखना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण अनुपयोगी बातों को भूलना भी है। प्रधानाचार्य ने कहा कि आने वाले समय में समाज को व्यापक रूप से दो वर्गों में देखा जा सकता है—जो जानते हैं और जो नहीं जानते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को निरंतर ज्ञानार्जन करते हुए स्वयं को सक्षम बनाना चाहिए। उन्होंने ‘मैं कर सकता हूँ’ की भावना को केवल बौद्धिक क्षमता से अधिक महत्वपूर्ण बताते हुए विद्यार्थियों को अपनी अंतर्निहित प्रतिभा को पहचानने और उसे विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ समन्वयक डॉ. दिनेश प्रसाद साह ने किया। उन्होंने भाषण प्रतियोगिता के विषय ‘आत्मनिर्भर भारत और स्वतंत्रता का नया आयाम’ की व्यापक अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल आर्थिक या औद्योगिक आत्मनिर्भरता नहीं है, बल्कि विचार, ज्ञान, कौशल, निर्णय और व्यक्तित्व के स्तर पर आत्मनिर्भर होना भी है। कार्यक्रम का संचालक करते हुए अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. युगेश्वर साह ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए संप्रेषण-कौशल को व्यक्तित्व-विकास की एक महत्वपूर्ण कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि प्रभावी संप्रेषण व्यक्ति को अपनी रुचि, क्षमता और व्यवसाय को पहचानने तथा उसे समाज के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में सहायता करता है। उन्होंने कहा कि भाषण प्रतियोगिता केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, तार्किकता, अभिव्यक्ति-कौशल और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का प्रभावी मंच है, जो उनके व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ सत्येंद्र कुमार झा ने विद्यार्थियों को निरंतर अभ्यास, व्यापक पठन तथा अपने विचारों को स्पष्ट एवं तार्किक ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के निर्णायक मंडल में डॉ. अभय सिंह, डॉ. विश्वदीपक त्रिपाठी एवं डॉ. ऋचा कुमारी शामिल रहे। निर्णायकों ने प्रतिभागियों के वक्तृत्व का मूल्यांकन करने के साथ-साथ उन्हें प्रभावी संप्रेषण, स्पष्ट उच्चारण, विषय-वस्तु की प्रस्तुति, आत्मविश्वास, शारीरिक हाव-भाव एवं समय-प्रबंधन के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

भाषण प्रतियोगिता में लगभग 50 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने आत्मनिर्भर भारत, युवा शक्ति, शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार, आत्मविश्वास, स्वतंत्र चिंतन तथा स्वतंत्रता के बदलते आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों की वक्तृत्व-कला, आत्मविश्वास एवं विषय की समझ ने कार्यक्रम को प्रभावशाली बनाया। सभी प्रतिभागियों को स्वतंत्र दिवस समारोह में प्रमाण पत्र प्रदान किए जायेंगे।

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