सूक्ष्मजीव फसलों के सतत विकास एवं संरक्षण की हैं आधारशिला : मुख्य वक्ता डॉ सतीश कुमार वर्मा
पादप सूक्ष्मजीव समुदाय तथा फसलों के विकास एवं संरक्षण में उनकी संभावित भूमिका’ पर व्याख्यान आयोजित
विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ अंकित कुमार माइक्रो बायोलॉजिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया के राज्य समन्वयक नियुक्त
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा माइक्रो बायोलॉजिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के सहयोग से “पादप सूक्ष्मजीव समुदाय (प्लांट माइक्रोबायोटा) तथा फसलों के विकास एवं संरक्षण में उनकी संभावित भूमिका” विषय पर एक आमंत्रित व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के वनस्पति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सतीश कुमार वर्मा ने पौधों के सूक्ष्मजीव समुदाय की कृषि एवं पर्यावरणीय महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं परिचय से हुआ। विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक एवं माइक्रोबायोलॉजिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के राज्य समन्वयक डॉ अंकित कुमार सिंह ने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए उनके शैक्षणिक एवं शोध योगदान का परिचय कराया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के व्याख्यान विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को नवीन वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ सबिता वर्मा ने की।
अपने व्याख्यान में डॉ सतीश कुमार वर्मा ने पौधों के साथ सहजीवी रूप से रहने वाले जीवाणु एवं कवकीय एंडोफाइट्स की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बीजों में प्राकृतिक रूप से विद्यमान सीड एंडोफाइट्स पौधों के विकास, पोषण एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। डॉ वर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में रासायनिक उर्वरकों एवं रसायनों के अत्यधिक उपयोग के कारण पौधों के प्राकृतिक माइक्रोबायोटा में निरंतर कमी आ रही है, जिससे कृषि पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि बीजों में उपस्थित लाभकारी एंडोफाइट्स अंकुरण के प्रारंभिक चरण में पौधों को विभिन्न रोगजनकों से सुरक्षा प्रदान करते हैं तथा स्वस्थ पौध विकास सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने अपने शोध निष्कर्षों को साझा करते हुए बताया कि ब्राउनटॉप मिलेट, धान एवं मक्का जैसी फसलों के बीजों में रहने वाले जीवाणु एंडो फाइट्स पौधों की प्रारंभिक वृद्धि एवं विकास को नियंत्रित करने, आवश्यक पोषक तत्त्व उपलब्ध कराने तथा रोग जनकों के प्रभाव को कम करने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य की टिकाऊ एवं जैविक कृषि व्यवस्था के लिए इन लाभकारी सूक्ष्मजीवों पर आधारित अनुसंधान एवं तकनीकों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। इस अवसर पर डॉ अंकित कुमार सिंह ने माइक्रो बायोलॉजिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रो देशमुख एवं प्रदेश अध्यक्ष प्रो रिमझिम शील के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें राज्य समन्वयक का दायित्व सौंपकर सोसायटी ने जो विश्वास व्यक्त किया है, वह उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बिहार में सूक्ष्मजीव विज्ञान एवं अंतःविषयक शोध गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। कार्यक्रम के समापन अवसर पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व परीक्षा नियंत्रक डॉ आनन्द मोहन मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य वक्ता, अध्यक्ष, सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ शहनाज़ जमील, एसोसिएट प्रोफेसर-सह-सीसीडीसी डॉ गजेन्द्र प्रसाद सहित विभाग के शिक्षक, शोधार्थी- गोविन्द कुमार, मोहन कुमार, काजल कुमारी, विकास कुमार, अर्जुन कुमार मेहरा, विक्की कुमार महतो अनेक विद्यार्थी आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताते हुए ऐसे वैज्ञानिक व्याख्यानों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में आईटी सेल के राजेश कुमार ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।