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जीरो ऑफिस डे के तहत जीविका ने गांव-पंचायत स्तर पर किया योजनाओं का व्यापक मूल्यांकन

सामुदायिक संस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाने पर दिया l जीविका द्वारा सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत बनाने एवं योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का जमीनी स्तर पर आकलन करने के उद्देश्य से जिले में दो दिवसीय जीरो ऑफिस डे का सफल आयोजन किया गया।

गुरुवार एवं शुक्रवार को आयोजित इस विशेष अभियान के अंतर्गत जिला परियोजना प्रबंधक डॉ.ऋचा गार्गी के नेतृत्व में जिले के सभी प्रखंडों में कार्यरत जीविका के अधिकारियों एवं कर्मियों ने कार्यालय कार्यों से बाहर निकलकर गांव एवं पंचायत स्तर पर व्यापक क्षेत्र भ्रमण किया।

 

इस दौरान अधिकारियों ने स्वयं सहायता समूह (SHG), ग्राम संगठन (VO) तथा संकुल स्तरीय संघ (CLF) की नियमित बैठकों में भाग लेकर उनके संचालन, निर्णय प्रक्रिया एवं वित्तीय प्रबंधन का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

 

विभिन्न सामुदायिक संस्थाओं के अभिलेखों का निरीक्षण करते हुए बचत, आंतरिक ऋण, बैंक ऋण, पुनर्भुगतान, सदस्यता विस्तार तथा नियमित बैठकों की स्थिति की समीक्षा की गई।

 

भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने जीविका दीदियों से संवाद स्थापित कर उनकी आजीविका गतिविधियों, कृषि, पशुपालन, सूक्ष्म उद्यम, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, स्वरोजगार एवं अन्य आयवर्धक गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की।

साथ ही महिलाओं द्वारा अपनाए गए नवाचारों, सफल प्रयासों तथा स्थानीय स्तर पर विकसित आजीविका मॉडलों का भी अवलोकन किया गया।

क्षेत्र भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने समूहों के समक्ष आने वाली चुनौतियों को गंभीरता से सुना तथा उनके समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

 

जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. ऋचा गार्गी ने बताई जीरो ऑफिस डे का उद्देश्य केवल निरीक्षण करना नहीं,बल्कि सामुदायिक संस्थाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित कर उनकी वास्तविक आवश्यकताओं को समझना तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि कार्यालय में बैठकर मिलने वाली सूचनाओं की तुलना में क्षेत्र में जाकर प्राप्त अनुभव के आधार पर अधिक व्यावहारिक एवं उपयोगी होते हैं। इससे समस्याओं की पहचान समय पर होती है तथा उनके समाधान के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जा सकती है।

 

संचार प्रबंधक राजा सागर ने बताया कि क्षेत्र भ्रमण के द्वारा योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होता है। क्षेत्र में जाकर विभिन्न सफल केस स्टडी, नवाचारों एवं उत्कृष्ट कार्यों का दस्तावेजीकरण किया जाता है, जिन्हें अन्य के लिए भी रोल मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता है। साथ ही जहां किसी प्रकार की कमी या चुनौती सामने आती है,वहां समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई अवश्य की जाती है। इस प्रकार के नियमित क्षेत्र भ्रमण से जीविका और समुदाय के बीच विश्वास एवं सहभागिता और मजबूत होती है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा गुणवत्ता में भी आदर्श सुधार देखने को मिलता है।

 

गौरतलब है कि दरभंगा जिले में वर्तमान में 44,290 स्वयं सहायता समूह (SHG) सक्रिय रूप से कार्यरत हैं, जिनसे लगभग 06 लाख जीविका दीदियाँ जुड़ी हुई हैं। इसके अतिरिक्त जिले में लगभग 3,200 ग्राम संगठन (VO) एवं 69 संकुल स्तरीय संघ (CLF) संचालित हैं।

ये संस्थाएं ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय समावेशन, सामूहिक बचत, ऋण सुविधा, स्वरोजगार, कृषि, पशुपालन, लघु उद्यम, सामाजिक विकास तथा सरकारी योजनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

जीविका के माध्यम से हजारों महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ गांवों में सामाजिक परिवर्तन की अग्रदूत बन रही हैं।

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