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ट्रैफिक नियमों का हो पालन व स्कूलों के पास बने ब्रेकर तो कम होंगे हादसे।

सड़क हादसों का मुख्य कारण दोपहिया वाहन चालकों का हेलमेट न पहनना और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है। अधिकतर दुर्घटनाओं में सिर की चोटें गंभीर होती हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोग हेलमेट को अनदेखा।

ट्रैफिक नियमों का हो पालन व स्कूलों के पास बने ब्रेकर तो कम होंगे हादसे
सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण दोपहिया वाहन चालकों का हेलमेट न पहनना और सुरक्षा नियमों को ना पालन करना बन गया है। सड़क हादसों में मरने वालों में अधिकतर दोपहिया वाहन चालक या सवार होते हैं। आए दिन दुर्घटनाओं में अधिकतर घायल और मृतक वे होते हैं, जिन्होंने सिर पर सुरक्षा कवच यानी हेलमेट नहीं लगाया होता। यदि समय पर हेलमेट का उपयोग किया जाए तो इन हादसों में बड़ी संख्या में जानें बचाई जा सकती हैं। ग्रामीण इलाकों और कस्बों में लोग हेलमेट को बोझ समझकर इस्तेमाल नहीं करते। वहीं शहर में युवा वर्ग फैशन और दिखावे की वजह से बिना हेलमेट बाइक चलाना पसंद करते हैं।

बोले समस्तीपुर अभियान के तहत लोगों ने अपनी समस्याओं के बारे में विस्तार से बताया।

 

सोनी सिंह और आदित्य सिंह बताते है कि नियम तोड़ने पर चालान से बचने के लिए लोग हेलमेट साथ रखते हैं, लेकिन पहनते नहीं। सड़क हादसों में सिर पर चोट लगना सबसे गंभीर स्थिति होती है। हेलमेट लगाने से ऐसी गंभीर चोटों से काफी हद तक बचाव संभव है। लोगों का कहना है कि पुलिस की ओर से समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन सख्ती की कमी के कारण लोग दोबारा लापरवाही बरतने लगते हैं।

 

जबकि लोगों का कहना है कि हेलमेट न लगाने वालों पर चालान के साथ कड़ी सजा दी जाए। स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों को हेलमेट पहनने की अनिवार्यता पर जागरूक किया जाए। सस्ते और अच्छे गुणवत्ता वाले हेलमेट आसानी से उपलब्ध कराए जाएं। वहीं अविनाश और राकेश कुमार सिंह बताते है कि हाईवे पर तेज रफ्तार के बीच दोपहिया वाहनों पर तीन लोग बैठकर यात्रा करना आम नजारा बन गया है। यह नियम विरुद्ध और बेहद खतरनाक है, लेकिन लापरवाह लोग इसे मजाक समझकर अनदेखा करते हैं। नतीजा यह है कि जरा सी चूक बड़े हादसे का कारण बन जाती है।

 

पिछले कुछ दिनों में जिले के हाईवे पर हुए कई सड़क हादसों की वजह यही रही है कि बाइक पर तीन सवारियां थीं। संतुलन बिगड़ने पर वाहन फिसल जाता है और पीछे बैठा व्यक्ति सड़क पर जा गिरता है। तेज रफ्तार से आ रहे ट्रक या कार की चपेट में आने से कई लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। चंदन कुमार ने बताया कि दोपहिया वाहन को केवल दो लोगों के लिए ही डिज़ाइन किया गया है। तीसरी सवारी बैठाने से वाहन का बैलेंस बिगड़ जाता है और दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

 

इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों और कस्बों में लोग तीन-तीन लोग बैठकर आराम से यात्रा करते दिखाई देते हैं। लोगों ने बताया कि इस तरह के हादसों में सबसे ज्यादा चोट सिर और रीढ़ की हड्डी पर आती है। अगर हेलमेट न हो तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। हेलमेट और ट्रैफिक नियमों का पालन अनिवार्य कराया जाए। रूही प्रवीण ने बताया कि यदि प्रशासन सख्ती से नियमों का पालन कराए और लोग खुद अपनी जिम्मेदारी समझें, तो हाईवे पर हो रहे इन हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। कस्बों के व्यस्त चौराहों पर स्पीड ब्रेकर न होने से सड़क हादसों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहाहैं ।

 

सड़क हादसों की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे है। प्रशासन का स्पष्ट निर्देश है कि सभी दोपहिया वाहन चालक एवं सवार अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनें। नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही ब्लैक स्पाॅट चिन्हित कर वहां साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं। -सुनील कांत, ट्रैफिक थानाध्यक्ष, समस्तीपुर

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