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इंजन में उल्लू फंसने से रुकी मिथिला एक्सप्रेस, ढाई घंटे रेल सेवा रही बाधित।

सिर्फ एक उल्लू ने सौ किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से भागती ट्रेन में ब्रेक लगा दी। चौंकिए मत, यह घटना पटना-हावड़ा मेन लाइन के सिमुलतला के पास हुई। रात के बादशाह उल्लू ने पटना-हावड़ा मेन लाइन पर शुक्रवार की रात दो घंटा 40 मिनट तक रेल सेवा बाधित कर दी। इस घटना की चर्चा हर तरफ हो रही है।

दरअसल, मिथिला एक्सप्रेस झाझा स्टेशन से खुलने के बाद सिमुलतला जंगल पार कर रही थी। झाझा के बाद सीधे जसीडीह में स्टॉपेज होने के कारण ट्रेन पूरी गति में थी। तभी एक उल्लू ट्रेन से टकराया और इंजन के पेंटो में फंस गया।

उल्लू फंसने के बाद ट्रेन चालक ने सिमुलतला स्टेशन पर ट्रेन खड़ी कर दी और कंट्रोल रूम को आगे ट्रेन नहीं बढ़ा पाने को लेकर सूचित कर दिया। अंधेरी रात में नक्सल प्रभावित सिमुलतला स्टेशन पर ट्रेन खड़ी होते ही यात्रियों में तरह-तरह की आशंका घर बनाने लगी। ट्रेन के हर डिब्बे में खामोशी छा गई। कुछ समय के बाद एक डिब्बे का आधा दरवाजा धीरे से खुला, ताका-झांकी के बाद कुछ यात्री उतरे।

इंजन में उल्लू फंसने की बात जानकर यात्रियों को राहत मिली। यात्री इंजन के करीब पहुंचकर फंसे हुए उल्लू को देखने की कोशिश कर रहे थे लेकिन अंधेरा होने के कारण उल्लू साफ नजर नहीं आ रहा था। बाद में जसीडीह से रेल टेक्नीशियन पहुंचे और बिजली पावर फंसे हुए उल्लू को इंजन के पेंटो से निकालने में जुट गए। लगभग एक घंटे का समय पक्षी को निकालने में लगा।

इसके बाद रात 9 बजकर 50 मिनट से खड़ी मिथिला एक्सप्रेस रात के 12 बजकर 30 मिनट पर जसीडीह की ओर आगे बढ़ सकी। इस दौरान विभिन्न स्टेशनों पर अन्य ट्रेनें खड़ी रहीं।

12370 डाउन देहरादून – हावड़ा एक्सप्रेस 12360 डाउन पटना – कोलकाता गरीब एक्सप्रेस 13186 डाउन जयनगर – सियालदाह गंगासागर एक्सप्रेस 13288 डाउन राजेंद्रनगर – दुर्ग साथ बिहार एक्सप्रेस

बिजली से चलने वाले इंजन के ऊपर लोहे के त्रिभुज आकार का संयंत्र लगा रहता है। इस संयंत्र के विद्युत प्रवाहित तार में संपर्क होने के बाद इंजन को बिजली की आपूर्ति होती है। इसे पेंटो कहते हैं। कहा जा रहा है कि उल्लू विद्वुत प्रवाहित तार और इस पेंटो के बीच फंस था।

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