अब यूजीसी 2022 विनियमावली से होगा शोधकार्य
संस्कृत विश्वविद्यालय में पीजीआरसी की बैठक में कई निर्णय
75 शोधबीज व प्रारूप पर हुआ विचार, कुछ में संशोधन की दरकार
दरभंगा।
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के दरबार हॉल में शनिवार को कुलपति प्रो.लक्ष्मीनिवास पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित स्नातकोत्तर शोध परिषद (पीजीआरसी) की बैठक कई मामलों में विशेष अहम रही। पूरे प्रदेश समेत अन्य प्रान्तों से आए विषय विशेषज्ञों ने शोध सम्बन्धी कई व्यवहारिक व सैद्धांतिक सुझाव दिए। इसी क्रम में आम सहमति रही कि विश्वविद्यालय में अब यूजीसी की विनियमावली 2022 के तहत शोधकार्य किये जायेंगे। यह विनिमावली सत्र 2022-23 से ही लागू माना जायेगा। ऐसे में स्वाभाविक तौर पर विश्वविद्यालय में वर्षो से संचालित हो रही विनिमावली 2016 को बैठक में निरस्त करने का फैसला लिया गया। उक्त जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के पीआरओ डॉ निशिकांत ने बताया कि बैठक में मूल रूप से छह प्रस्ताव लाये गए थे जिसमें 12 फरवरी, 25 को आयोजित गत बैठक को सम्पुष्ट करते हुए इसी बैठक में लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन पर भी सहमति बनी। वहीं, करीब दर्जन भर गवेषकों को अवधि विस्तार दिया गया और शोधबीज व प्रारूप में संशोधन के साथ उसे हरी झंडी दी गयी। शेष गवेषकों के शोधबीज पर यथावत स्थिति में परिषद की सहमति रही। पर्यवेक्षकों के चयन पर भी विचार किया गया।
पीआरओ डॉ निशिकांत ने आगे बताया कि शोध प्रभारी सह धर्मशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. दिलीप कुमार झा के स्वागत भाषण व संचालन में आयोजित परिषद की बैठक के मुख्यातिथि रहे सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, गुजरात के पूर्व कुलपति प्रो. अर्कनाथ चौधरी। प्रो. चौधरी ने भी शोध सम्बन्धी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में
2022-23 वर्षीय कुल 75 गवेषकों का शोध प्रारूप एवं शोध बीज प्रस्तुत किया गया जिसमें
विद्या वाचस्पति के आठ एवं विद्यावारिधि के 67 गवेषक शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि परिषद के कुल 32 सदस्यों में से 31 ने भाग लिया। यूपी, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखण्ड, दिल्ली समेत अन्य राज्यों के वाह्य विषय विशेषज्ञों समेत सभी संकाय अध्यक्षों, विभागाध्यक्षों, प्राचार्यों, विशेष आमन्त्रित सदस्य प्रो० अर्कनाथ चौधरी, प्रो० राजीव रंजनसिंह, प्रो० शिवाकांत झा , प्रो. व्यास मिश्र, प्रो० शंकर कुमार मिश्र, प्रो उपेन्द्र कुमार त्रिपाठी, प्रो० उपेन्द्र झा, प्रो रामपूजन पाण्डेय, प्रो० महेश झा, प्रो चन्द्रशेखर पाण्डेय, डॉ. राजेश्वर दुबे, प्रो० शत्रुघ्न त्रिपाठी, प्रो. दिलीप कुमार झा, प्रो. पुरेन्द्र वारिक, प्रो दयानाथ झा, प्रो अर्कनाथ चौधरी, प्रो राजीव रंजन सिंह, प्रो प्रियव्रत मिश्र ,प्रो. उमेश शर्मा, डॉ सीता चरण झा, डॉ ध्रुव कुमार मिश्र, डॉ धीरज कुमार पांडेय, डॉ सुधीर कुमार, डॉ रामनिहोरा राय, डॉ शंभुशरण तिवारी, डॉ शिवलोचन झा, कुलसचिव डॉ दिनेश कुमार झा, ओएसडी डॉ रामसेवक झा की उपस्थिति रही।