बजट पर बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन का सुझाव
पटना:3 मार्च को बिहार का बजट आएगा. कई क्षेत्रों के लोगों से बिहार सरकार ने सलाह ली है. सरकार इंडस्ट्री पर फोकस कर रही है. पिछले साल के अंत में इन्वेस्टर मीट में 180000 करोड़ से अधिक के निवेश के प्रस्ताव पर सहमति बनी थी. वहीं अब बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने सरकार को सलाह दी है कि बिहार में फार्मा उद्योग को लेकर एक बड़ा पार्क बने क्योंकि यह बड़ा सेक्टर है और बिहार के कई बड़े उद्योगपति इस क्षेत्र में है, इसमें रोजगार के भी काफी अवसर मिलेंगे.
इंडस्ट्रीज एसोसिएशन का सरकार को सुझाव: बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष केपीएस केसरी ने कहा कि पांच पन्नों का एक पत्र बिहार सरकार को दिया गया है, जिसमें कई सुझावों के साथ-साथ कई मांगें भी की गईं हैं. उन्होंने कहा कि हम लोगों ने सरकार से कहा है कि बिहार में एक्सप्रेस वे और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बन रहा है तो वहां इंडस्ट्रियल पार्क की जगह इंडस्ट्रियल टाउनशिप डेवलप कीजिए. इंडस्ट्री से जुड़े हुए कामगारों और लोगों के रहने की व्यवस्था हो. साथ ही उद्योग के लिए जमीन का भी वर्गीकरण होना चाहिए.
बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष केपीएस केसरी “अभी कई तरह की परेशानियों का सामना हमें करना पड़ता है. बाहर से निवेश के प्रस्ताव आए हैं, अच्छी बात है.
उस पर काम होना चाहिए लेकिन बिहार के एंटरप्रेन्योर को भी आगे बढ़ाने के लिए सरकार को काम होना चाहिए. फार्मा इंडस्ट्री को लेकर क्या सुझाव दिया गया है.”- केपीएस केसरी, अध्यक्ष, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन’बिहार में फार्मा इंडस्ट्री पार्क डेवलप हो’: केपीएस केसरी ने कहा कि फार्मा इंडस्ट्री को लेकर बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की ओर से सुझाव दिया गया है कि बिहार में फार्मा इंडस्ट्री पार्क डेवलप किया जाए. 50 और 100 एकड़ का नहीं, उससे बड़ा पार्क बनना चाहिए. बिहार और इससे सटे आसपास के जोन में दवा और उपकरण को मिला दिया जाए तो 70000 करोड़ की राशि हर साल खपत होती है और 2030 तक यह डबल हो जाएगी.
इसलिए इस क्षेत्र में काफी संभावना है.बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा किसुखद बात है कि बिहार के दो बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट संपदा सिंह और महेंद्र प्रसाद बिहार से ही थे. हालांकि अब दोनों नहीं रहे लेकिन इस क्षेत्र में बड़े नाम हैं. उन्होंने कहा कि फार्मा इंडस्ट्री यदि कोई हिमाचल और दूसरे स्थान से ही बिहार में लाता है तो री-लोकेशन का जो खर्च है, वह सरकार को वहन करना चाहिए.
कुछ बड़ी इंडस्ट्री आएंगी तो उसके साथ कई इंडस्ट्री का आना शुरू हो जाएगा और फार्मा इंडस्ट्री खासकर उन इलाकों में होना चाहिए, जहां एयरपोर्ट और आधुनिक सुविधा उपलब्ध हो क्योंकि बड़े पैमाने पर इसमें निर्यात भी संभव है.निवेश के प्रस्ताव की असलियत?: बिहार में निवेश के प्रस्ताव तो आ रहे हैं तो क्या जमीन पर भी उतर रहे हैं? इस पर केपीएस केसरी का कहना है कि लोग आ रहे हैं, हम लोग भी इसमें लगे हुए हैं. यह हम लोगों के लिए भी एक बड़ा चैलेंज है लेकिन निवेशक चाहते हैं कि हेड ऑफ स्टेट का पॉजिटिव रुख हो.
उनसे उनकी बातचीत हो तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पॉजिटिव रूख तो है लेकिन सीएम को इन्वेस्टर से मिलने के लिए समय भी निकालना होगा.बजट में क्या डिमांड है आपकी?:बिहार इंडस्ट्री एसोसिएशन की तरफ से बजट में क्या डिमांड की गई है? इस पर केपीएस केसरी का कहना है कि छूट की डिमांड तो हम लोग लगातार करते रहे हैं. अब पीएनजी लगाने की बात है. पहले कोयला का प्रयोग होता था, अब पीएनजी लगाना है. हालांकि इसमें बहुत अधिक राशि की जरूरत नहीं पड़ेगी लेकिन सरकार को पीएनजी बदलने में जो खर्च हो रहा है उसे वहन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम लोगों को उम्मीद है कि बिहार के बजट का आकार इस बार बड़ा होगा. साथ ही इंडस्ट्री क्षेत्र के बजट में भी वृद्धि होगी.
पर्यटन से लेकर कई उद्योग पर ध्यान देने की सलाह: बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की तरफ से पांच पन्नों का एक लेटर भी बजट को लेकर बिहार सरकार को दिया गया है, इसमें इंडस्ट्रियल टाउनशिप के लिये कैमूर, ठाकुरगंज , पूर्णिया, सोनपुर, हाजीपुर का सुझाव दिया गया है. इसके अलावा पर्यटन, चमरा उद्योग , टेक्सटाइल उद्योग पर भी सरकार को फोकस देने के लिए कहा गया है.
इन क्षेत्र पर भी ध्यान देने की अपील: हालांकि सबसे ज्यादा फार्मास्यूटिकल क्षेत्र पर ध्यान देने का सुझाव दिया गया है, क्योंकि इस क्षेत्र में 5.50 लाख करोड़ का कारोबार अभी देश में होता है. जो 2030 में बढ़कर 11 लाख करोड़ हो जाएगा और बिहार में फार्मास्यूटिकल उत्पादन की खपत में जो हिस्सेदारी है, वह 14% के आसपास है लेकिन उद्योग इस क्षेत्र में नगण्य है तो इस क्षेत्र में काफी संभावना है. इंडस्ट्री के विकास से ही रोजगार के व्यापक अवसर पैदा होंगे और बिहार का सीडी रेशियो भी बढ़ेगा, साथ ही प्रति व्यक्ति आय भी बढ़ेगा.





