दरभंगा : दिल्ली विधानसभा चुनाव में बिहार के 4 कैंडिडेट:दरभंगा के अभय वर्मा लक्ष्मी नगर सीट पर आगे, मधुबनी से AAP के 2 कैंडिडेट्स का भी जानें हाल
दरभंगा के अभय वर्मा लक्ष्मी नगर सीट पर आगे, मधुबनी से AAP के 2 कैंडिडेट्स का भी जानें हाल
दिल्ली में विधानसभा चुनाव में बिहार के चार कैंडिडेट्स भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें से तीन कैंडिडेट मधुबनी के रहने वाले हैं, जबकि एक दरभंगा से हैं। फिलहाल, अब तक रुझानों में दिल्ली में 27 साल बाद भाजपा की वापसी दिख रही है। आइए, जानते हैं कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों में मूल रूप से बिहार के रहने वाले कैंडिडेट्स का क्या हाल है।
दरभंगा के रहने वाले अभय वर्मा भाजपा के टिकट पर लक्ष्मी नगर, मधुबनी के रहने वाले अनिल झा भाजपा के टिकट पर किरारी, मधुबनी के रहने वाले संजीव झा आप के टिकट पर बुराड़ी और मधुबनी के ही रहने वाले विनय मिश्रा आप के टिकट पर द्वारका विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं।
सबसे पहले जानिए, पेशे से वकील अभय वर्मा के बारे में
अभय वर्मा पेशे से वकील भी हैं। उनके पिता बांके बिहार वर्मा मूल रूप से दरभंगा के रहने वाले थे। अभय दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष भी हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में अभय वर्मा ने आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी नितिन त्यागी को महज 880 वोटों से चुनाव हराया था।
इनका जन्म छपरा जिला के हरपुर कर के बनियापुर गांव में पांच जनवरी 1973 को हुआ था। दरभंगा के राज हाई स्कूल से 10 वीं करने के बाद दरभंगा के ही सीएम साइंस कॉलेज से पढाई की। इसके बाद पढाई करने दिल्ली चले गए। वहां 1993 में LLB करना शुरू किया और इस दौरान राजनीति से लगाव बढ़ा तो ABVP से जुड़ गए।
अभय वर्मा ने 1996 में LLB की डिग्री हासिल की। साल 2003 में दिल्ली बार काउंसिल के युवा प्रतिनिधि चुने गए। इस दौरान इन्होंने करप्शन और कई अनियमितताओं पर आवाज उठाई। साल 2007 में भारतीय जनता पार्टी के लीगल सेल से जुड़े। दिल्ली भाजपा के पूर्वांचल प्रकोष्ठ के संयोजक के रूप में काम किया है और वर्तमान में भाजपा दिल्ली का प्रदेश उपाध्यक्ष भी है।
30 नवंबर 2001 को अभय वर्मा ने अमृता प्रकाश से शादी की थी। इनकी दो बेटियां असमी और अन्वी हैं। फिलहाल अभय अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दिल्ली के लक्ष्मी नगर में रहते हैं।
2008 और 2013 में भाजपा के टिकट पर जीते थे अनिल झा
मधुबनी के रहने वाले अनिल झा भाजपा के टिकट पर किराड़ी विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं। फिलहाल अनिल झा 11 हजार 974 वोटों से आगे चल रहे हैं।
अनिल झा ने नवंबर 2024 में भाजपा को छोड़ दिया था और केजरीवाल की मौजूदगी में आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। अनिल झा 32 सालों से भाजपा के सक्रिय सदस्य रहे थे।
उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के शिवाजी मार्ग स्थित एसबी मिल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल से की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और फिर इसी यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया।
दिल्ली यूनिवर्सिटी का छात्र संघ चुनाव भी लड़ा था
अनिल झा जब सत्यवती कॉलेज में पढ़ाई करते थे, तब उन्होंने यहां छात्र संघ चुनाव लड़ा और अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। साल 1997-98 में उन्हें दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ का अध्यक्ष भी चुना गया था। सबसे पहले उन्होंने 2008 में भाजपा के टिकट पर किराड़ी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
अनिल झा को 2008 और 2013 में भाजपा के टिकट पर जीत हासिल हुई थी, जबकि 2015 और 2020 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
अनिल झा का जन्म 1974 में बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी में हुआ था। अनिल झा ने अंबेडकर विश्वविद्यालय (जिसे पहले आगरा विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता था) से साल 2018 में लॉ की पढ़ाई पूरी की। अनिल झा की पत्नी भी निगम पार्षद रह चुकी हैं। अनिल झा के पिता का नाम आनंद मोहन झा है आनंद मोहन दिल्ली में किसी निजी कम्पनी में काम करते थे।
दिल्ली में पिता की विरासत संभाल रहे विनय मिश्रा
मधुबनी के रहने वाले विनय मिश्रा आम आदमी पार्टी के टिकट पर द्वारका विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं, जो 2,567 वोटों से पीछे चल रहे हैं।
दिल्ली के द्वारका विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे विनय मिश्रा मूल रूप से बिहार के मधुबनी के बासोपट्टी सीरियापुर गांव के रहने वाले हैं। इनके पिता मिलिट्री में थे और काफी पहले गांव छोड़कर दिल्ली में बस गए थे। वहीं, विनय मिश्रा का जन्म हुआ।
मिलिट्री से रिटायरमेंट के बाद विनय के पिता राजनीति में जुड़ गए थे। वे दिल्ली में कांग्रेस की राजनीति करते थे। कांग्रेस की टिकट पर दिल्ली से दो बार के विधायक और एक बार के सांसद भी बने।
अरविंद केजरीवाल की राजनीति से प्रभावित होकर विनय मिश्रा आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। 2020 में उन्हें द्वारका से टिकट मिला और वह जितने में सफल रहे। एक बार फिर से पार्टी ने उन्हें द्वारका से अपना कैंडिडेट बनाया है।
मधुबनी में विनय के चाचा बताते हैं, ‘विनय मिश्रा के परिवार की गिनती गांव में एक समृद्ध परिवार के रूप में होती है। वह भले अब दिल्ली में रहते हैं लेकिन जब भी गांव को उनकी जरूरत होती है वह आते हैं। गांव से आज भी उनका गहरा लगाव है।’
मधुबनी के संजीव झा IAS बनने गए थे, विधायक बन गए, चौथी बार मैदान में
मधुबनी के ही रहने वाले संजीव झा बुराड़ी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं। वे 4 हजार 092 वोटों से आगे हैं। संजीव झा आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं।
बिहार के मधुबनी जिले के रहने वाले संजीव झा आम आदमी पार्टी के साथ शुरुआती दिनों से जुड़े हैं। उनकी मां गायत्री देवी बताती हैं, वो यहां से IAS बनने का सपना लेकर दिल्ली गए थे। लगभग 4-5 साल तक वहां तैयारी भी की। इसी बीच दिल्ली में अन्ना आंदोलन शुरू हो गया। उन्होंने इसमें एक्टिव वॉलंटियर की भूमिका निभाई।’
आंदोलन के बाद जब अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनाई तब वह उनके साथ जुड़ गए।
झा दिल्ली के बुराड़ी सीट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार हैं। 2013 के चुनाव में संजीव को AAP ने बुराड़ी सीट से प्रत्याशी बनाया था। संजीव ने इस चुनाव में बीजेपी के श्री किशन को पटखनी दी थी।
वह 2015 और 2020 के चुनाव में भी बुराड़ी सीट से जीत कर सदन पहुंचे। संजीव झा आम आदमी पार्टी के बिहार प्रभारी भी हैं। उन्हें आम आदमी पार्टी के टॉप लीडरशिप का करीबी माना जाता है।
