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विश्वविद्यालय मैथिली विभाग द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन।

दरभंगा: मैथिली विषय के शोधार्थियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रो. दमन कुमार झा ने की। अपने संबोधन में प्रो. झा ने शोध हेतु निर्धारित गाइडलाइन को शोधार्थियों के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अब शोधार्थियों को प्रत्येक छमाही की प्रगति- प्रतिवेदन निश्चित रूप से जमा करनी है। शोध से सम्बंधित सभी सामग्रीयों को शोध-चक्र पर अपलोड भी करनी है।जो भी शोधार्थी हैं वे शोध से सम्बंधित अध्ययन हेतु महीना मे पाँच दिन अवश्य केंद्रीय पुस्तकालय में आकर अध्ययन करेंगे। उस प्रमाण पत्र के पश्चात् ही उनकी प्रगति प्रतिवेदन अग्रसरित की जाएगी। जो भी शोधार्थी अभी तक पुस्तकालय का सदस्य नहीं बने हैं, वे अवश्य बन जायें। उन्होंने शोधार्थीयों को शोध से सम्बंधित कई जानकारीयों से अवगत कराया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए विभागीय वरीय प्राचार्य प्रो. अशोक कुमार मेहता ने कहा कि शोधार्थियों को आरंभिक चरण में ही विशेष निर्देशन की आवश्यकता है। शोध प्रबंध की मौलिकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि शोधार्थियों को निर्धारित समयावधि का सदुपयोग करते हुए बाद में होने वाली आपाधापी से बचना चाहिए। डाॅ. अभिलाषा ने अपने वक्तव्य में कहा कि शोधार्थियों को आधुनिक संसाधन का उपयोग करते हुए निरंतर अपने शोध-निर्देशक एवं विभिन्न विद्वानों के सानिध्य में रहते हुए शोध की नई तकनीकों का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं डाॅ. सुरेश पासवान ने कहा कि नियमितता से ही शोध को निमित्त रूप दी जा सकती है। इस कार्यशाला में पैट 2018 से 2020 तकके शोधार्थीयों द्वारा किये गये प्रश्नों को हाल किया गया।प्रश्न पूछने बालों में विष्णु प्रसाद, मोहन मुरारी, मनीष कुमार, पुरषोत्तम कुमार झा, रेनू कुमारी, अमित कुमार झा, सोनी कुमारी, सत्यनारायण प्रसाद यादव, दीपेश कुमार, दीपक कुमार, शालिनी कुमारी, राज्यश्री, भोगेन्द्र, नीतू कुमारी, आदि प्रमुख थे।

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