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बिहार : बिहार में पारा लुढ़कने से ठंड का असर बढ़ा, शाम होते ही घरों में दुबक जा रहे लोग

सीतामढ़ी में गिरते पारे के साथ ठंड ने अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। सुबह के घने कोहरे के बाद धूप निकलने से कुछ राहत मिलती है, लेकिन शाम होते ही ठंड बढ़ जाती है। ठंड से बचने के लिए लोग जल्दी घरों में लौट रहे हैं, और सरकारी कर्मचारियों को खासकर परेशानी हो रही है।

 

बिहार में ठंड का सितम शुरू, आने वाले समय में ठंड में तेजी से वृद्धि होने की संभावना
सीतामढ़ी में अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस
मौसम जनित बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में 20 फीसदी तक बढ़ोतरी
डॉक्टरों ने सलाह- सुबह और शाम गर्म कपड़े पहनकर घर से बाहर निकलें

सीतामढ़ी: बिहार में पारा लुढ़कने के साथ ही ठंड का सितम शुरू हो गया है। मौसम विभाग की माने तो आने वाले कुछ समय में ठंड में तेजी से वृद्धि होने की संभावना है। जिले के मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। शनिवार को सुबह देर तक घने कोहरे छाए रहे। सुबह में करीब नौ बजे के बाद ही धूप निकली, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली। अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। खास कर सुबह में कोहरे के चलते वाहन चालकों को काफी संभल कर गाड़ी ड्राइव करनी पड़ रही है। कारण कि कोहरे से दुर्घटना की संभावना अधिक बनी रहती है और दुर्घटनाएं होती भी हैं।

शाम होते ही बढ़ रहा ठंड
शाम होते ही ठंड बढ़ जा रहा है। इससे बचने के लिए लोग समय रहते घरों में दुबक जा रहे हैं। दिन छोटा हो रहा है। सबसे बड़ी परेशानी सरकारी सेवकों को है, जो शाम ढलने तक कार्यालय में रहते हैं। जब वे घरों के लिए चलते है, तो एक ओर जहां अंधेरा हो जाता है, तो दूसरी ओर ठंड भी बढ़ जाती है। बहरहाल, जैसे-तैसे उन्हें ठंड को झेलते हुए जाना पड़ता है। दूर-दराज के यानी प्रखंडों में कार्यरत कर्मी ठंड के चलते तबादले के लिए आवेदन देने का मन बना रहे हैं।

बच्चों पर ठंड का अधिक असर
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, कुछ दिनों तक तापमान में कोई विशेष बदलाव की संभावना नहीं है। इधर, सदर अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी, रेफरल और अनुमंडलीय अस्पतालों में मौसम जनित बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या में 20 फीसदी तक इजाफा हुआ है। नवजात और छोटे बच्चें कोल्ड डायरिया और निमोनिया के प्रकोप से पीड़ित हो रहे हैं। ठंड की वजह से वयस्कों और बुजुर्गों में भी सर्दी, खांसी, बदन दर्द, सांस फूलने और सीने में दर्द जैसी समस्याएं बढ़ गई है।

रैन बसेरा नहीं होने से गरीबों को परेशानी
शहर में देर रात तक रिक्शा चलाने और मजदूरी करने वाले गरीबों के लिए यह ठंड अभिशाप साबित होने लगा है। ऐसे लोगों के लिए हर साल नगर निकायों की ओर से रैन बसेरा या फिर आश्रय स्थल का संचालन किया जाता है, लेकिन कई जगहों पर रैन बसेरा नहीं है। इसके लिए सर्वे चल रहा है। इससे इस बार ठंड में जरूरतमंदों को ठिठुरना होगा।

नगर निगम भी रेलवे स्टेशन परिसर में अस्थाई आश्रय स्थल का निर्माण करवाता था, जिसमें देर रात स्टेशन और बसों से उतरने वाले यात्रियों के साथ ठेला और रिक्शाचालक भी आश्रय स्थल में रहकर ठंड की रात काटते थे, लेकिन इस बार अबतक आश्रय स्थल का निर्माण नहीं हो सका है। पुपरी, बेलसंड और बैरगनिया में नगर निकाय की ओर से आश्रय स्थल का संचालन शुरू किया जा चुका है, तो सुरसंड में अबतक आश्रय स्थल या रैन बसेरा के लिए सर्वे ही हो रहा है।

क्या है डॉक्टर की सलाह
शहर के प्रसिद्ध डॉक्टर और अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ हेमंत कुमार ने बताया कि सुबह और शाम गर्म कपड़े में ही घर से बाहर निकलना चाहिए। जब कुहासा अधिक हो और सुबह में ठंडी हवा चले, तो व्यायाम, जॉगिंग या योगा नहीं करना चाहिए। भोजन में हरी सब्जी, दाल, रोटी गर्म करना चाहिए। साथ ही विटामिन सी वाले फल अखरोट, तुलसी, लहसुन, दूध और हल्दी का सेवन भी करना चाहिए

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