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समाज में व्याप्त सामाजिक विषमता को खत्म करने के लिये प्रतिबद्ध थे बाबू जगजीवन राम: प्रो. मुनेश्वर यादव।

समतामूलक समाज और संसदीय प्रजातंत्र के पुरोधा थे बाबू जगजीवन राम: प्रो. प्रभाष चंद्र मिश्रा।

सामाजिक सोच एवं व्यवहार में समानता लाकर ही बाबू जगजीवन राम को दी जा सकती है सच्ची श्रद्धांजलि: डॉ. मनोज कुमार।

बुधवार को विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग में विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव की अध्यक्षता में बाबू जगजीवन राम की 116 वीं जन्म जयंती उल्लासपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम का श्रीगणेश सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. प्रभाष चंद्र मिश्र व विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

बतौर मुख्य अतिथि सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. प्रभाष चंद्र मिश्र ने बाबू जगजीवन राम को भारत में समतामूलक समाज और संसदीय प्रजातंत्र का पुरोधा बताया। बाबू जगजीवन राम भारतीय राजनीति के आदर्श व्यक्तित्व थे। समतामूलक समाज की स्थापना के बदौलत ही भारत, विश्वगुरु बनने की राह पर अग्रसर है।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने बाबूजी से प्रेरणा ग्रहण करते हुए शिक्षा एवं संघर्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त सामाजिक विषमता को खत्म करने के लिये वो प्रतिबद्ध थे। उनके प्रतिबद्धता का परिणाम रहा कि समाज में व्याप्त छुआछूत को जड़ से खत्म कर दिया। समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े दबे-कुचले वर्ग की आवाज बनकर बाबूजी उभरे। आज पदोन्नति में आरक्षण उनके संघर्ष का परिणाम है। बाबूजी का जीवन सदैव युवाओं के लिये अनुकरणीय है। उनके जीवन से आपलोग सीख लें और यहां बैठे शोधार्थियों से भी मैं यह आह्वान करता हूँ कि वो बाबू जगजीवन राम पर शोध करें।

विभागीय शिक्षक एवं विश्वविद्यालय के उप परीक्षा नियंत्रक द्वितीय डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि राजनीतिक एवं कानूनी रूप से शामिल मिल चुकी है। परन्तु सामाजिक सोच एवं व्यवहार में समानता लाकर ही बाबू जगजीवन राम के लिये सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है। इस अवसर पर रघुवीर कुमार रंजन, संकेत कुमार झा, शोधार्थी आशुतोष कुमार पांडे आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

इस अवसर पर बाबू जगजीवन राम के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विभिन्न स्नातकोत्तर विभागों से आए छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों के बीच आशुभाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें राजनीति विज्ञान विभाग के नीतीश नायक को प्रथम स्थान, हिंदी विभाग के स्नेहा कुमारी को द्वितीय स्थान और अंग्रेजी विभाग के हर्ष कुमार को तृतीय स्थान मिला। इस प्रतियोगिता के निर्णायक मंडली में इंग्लिश विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. संकेत कुमार झा राजनीति विज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापिका नीतू कुमारी उपस्थित थी।

मंच संचालन शोध प्रज्ञा अस्मि ने किया जबकि स्वागत भाषण, सचिव डॉ. मुकुल बिहारी वर्मा ने किया व धन्यवाद ज्ञापन नीतू कुमारी ने किया।

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