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बिहार : बिहार में जाति पर मांझी-लालू में छिड़ी जंग! वंशावली बताने की चुनौती तक पहुंची बात

हम पार्टी के संरक्षक जीतन राम मांझी और आरजेडी सुप्रीम लालू यादव के बीच जुबानी जंग छिड़ी है. दोनों जाति पर एक दूसरे पर हमला कर रहे हैं. ताजा बयान हम की ओर से आया है. मांझी की पार्टी ने लालू को अपनी वंशावली जारी करने की चुनौती दी है.

बिहार की राजनीति दो सियासी दिग्गजों के बीच केंद्रित हो गई है. राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और हम पार्टी के संरक्षक जीतन राम मांझी के बीच जाति को लेकर जंग छिड़ गई है और बात वंशावली जारी करने की चुनौती तक पहुंच गई है. दरअसल, बुधवार को केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि लालू यादव यादव नहीं बल्कि गडरिया हैं. मांझी के बयान पर पलटवार करते हुए लालू यादव ने कहा कि वो मुसहर हैं क्या. इसके बाद आज यानी गुरुवार को मांझी की पार्टी ने लालू यादव को अपनी वंशावली जारी करने की चुनौती दी.

लालू यादव को दी गई चुनौती में हम पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्याम सुंदर शरण ने गुरुवार को एक बयान जारी करते हुए कहा, लालू प्रसाद यादव अपनी पूरी राजनीति में दलित विरोधी मानसिकता के रहे हैं. जब से वह राजनीति में आए दलितों को उन्होंने पैरों की जूती समझा. आज प्रधानमंत्री ने समाज के सबसे निचले पायदान पर आने वाले व्यक्ति जीतन राम मांझी को केंद्रीय मंत्री बनाया तो उनको और ज्यादा बौखलाहट हो रही है. वह बौखलाहट में अंट-शंट बयान दे रहे हैं. हमारी चुनौती है कि लालू प्रसाद अपनी वंशावली को जारी करें.

HAM ने लालू को दी चुनौती
श्याम सुंदर ने आगे कहा कि आप सही मायनों में यादव हैं या गडरिया हैं, यह पता चल जाएगा. बिहार सरकार ने तो जमीन के सर्वे में लोग वंशावली बना रहे हैं. आप भी बनाइये. आपकी संपत्ति की भी जांच हो जाएगी, उसका बंटवारा भी हो जाएगा और आपकी जाति का भी पता चल जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि वास्तविकता है कि दुनिया के सबसे बड़े घोटालेबाज लालू प्रसाद यादव आपने अपनी जाति में भी घोटाला किया है. अगर हिम्मत है तो अपनी तीन पीढ़ी की वंशावली को जारी करें. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.

 

उधर जीतन राम मांझी ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. जीतन राम मांझी ने लिखा है, लालू जी हम मुसहर-भुइयां हैं. हमारे पिता मुसहर-भुइयां थे. हमारे दादा मुसहर-भुइयां थे. हमारे परदादा मुसहर-भुइयां थे. हमारा तो पूरा खानदान ही मुसहर- भुइयां है. और हम तो गर्व से कहते हैं कि हम मुसहर-भुइयां हैं.

जुबानी जंग की शुरुआत कहां से हुई?
दरअसल बुधवार को जीतन राम मांझी ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि लालू यादव यादव नहीं हैं, बल्कि गडरिया हैं. मांझी ने कहा कि वह लोग नहीं पढ़े हैं. हम तो पढ़ कर आए ही हैं. बीए ऑनर्स किए हैं. उनकी डिग्री क्या है? वह बताएं. दूसरी बात यदि वह हमें शर्मा कहते हैं, तो वह अपने पिताजी के बारे में बताएं. उनके पिताजी किसके जन्मे हुए हैं? गडरिया के जन्मे हुए हैं. वह गडरिया हैं, यादव नहीं हैं. मांझी का बयान आने के बाद लालू यादव ने भी पलटवार किया. उन्होंने कहा कि वो मुसहर हैं क्या.

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