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दरभंगा : नाबालिग का यौन शोषण…उपमुखिया ने 4 लाख में कराया समझौता:शिकायत पर थानाध्यक्ष बोले- पंचायत का फैसला सही, SSP ने किया सस्पेंड, मामला दर्ज

शिकायत पर थानाध्यक्ष बोले- पंचायत का फैसला सही, SSP ने किया सस्पेंड, मामला दर्ज
दरभंगा SSP जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी ने लिया एक्शन।
दरभंगा में 5 जून को उपमुखिया ने पंचायत में नाबालिग से यौन शोषण मामले का समझाैता 4 लाख रुपए में कर दिया है। वहीं इस फैसले को जब पीड़िता (15) के परिजनों ने मानने से इनकार कर दिया, तो उनके साथ मारपीट की गई। वहीं पीड़ित पक्ष ने जब थाने में आवेदन दिया तो थानाध्यक्ष ने पंचायत के फैसले को जायज करार देते हुए पीड़ित को वापस कर दिया। वहीं SSP जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी की जनता दरबार में फरियाद लेकर पहुंचे पीड़ित परिवार की शिकायत के बाद अब इस मामले में SSP ने सर्कल इंस्पेक्टर को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देते हुए हायाघाट थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया है।

इस मामले में पीड़िता ने आरोप लगाया कि गांव का एक युवक शादी का झांसा देकर यौन शोषण करता रहा। वहीं जब शादी करने की बात कही गई, तो उसने इंकार कर दिया। इस मामले में उपमुखिया के नेतृत्व में पंचायत बैठी। गांव के गणमान्य लोगों के बीच बैठे उपमुखिया ने पीड़िता के अस्मत की कीमत 4 लाख रुपए लगाकर मामले को रफा-दफा करने का फरमान सुनाते हुए एकरारनामा बनवा दिया। वहीं इस फैसले को जब पीड़िता ने मानने से इनकार कर दिया तो उनके साथ मारपीट की गई। इसकी शिकायत लेकर पीड़िता और उसकी मां ने हायाघाट थाने में आवेदन दिया तो थानाध्यक्ष ने पंचायत के फैसले को जायज करार देते हुए पीड़ित को लौटा दिया।

घटना की शिकायत करने SSP कार्यालय पहुचा पीड़ित परिवार।
उपमुखिया के नेतृत्व में बैठी थी पंचायत

वही निराश परिजन जब एसएसपी के जनता दरबार में दो वर्षों तक यौन शोषण का शिकार रही पीड़ित इंसाफ के लिए पहुंची, तो पुलिस कप्तान पीड़ित परिवार की बातें गंभीरता के साथ सुना। पीड़िता ने आरोप लगाया कि गांव के ही एक युवक शादी का झांसा देकर दो वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाया। अब शादी की बात करते है तो युवक शादी से इनकार कर रहा है। इस घटना को लेकर गांव में उपमुखिया के नेतृत्व में पंचायत बैठी। गांव के गणमान्य लोगों के बीच बैठे मुखिया ने पीड़ित के अस्मत की कीमत 4 लाख रुपये लगाकर मामले को रफा-दफा करने का फरमान सुनाते हुए एकरारनामा बनवा दिया।

क्या बोली पीड़िता

पीड़िता ने कहा कि पंचायत के इस फैसले के खिलाफ हमलोग 20 दिनों तक हायाघाट थाने का चक्कर लगाते रहे, लेकिन पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया। वहीं पीड़ित परिवार ने थानाध्यक्ष पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि थाना प्रभारी ने पंचायत वाले इकरारनामे को महत्व देते हुए को पंचायत के फैसले को मानने की बात कहकर थाने से वापस कर दिया था। वहीं पीड़िता ने कहा कि जब हमलोगों को न्याय नहीं मिला, तब SSP की जनता दरबार में न्याय की फरियाद लेकर पहुंचे हैं।

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