Friday, May 15, 2026
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राजभवन की बढ़ाई गई सुरक्षा, बम होने की मिली थी सूचना।

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बिहार राजभवन में बम होने की सूचना वाला ईमेल मिलने के बाद इसकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राजीव मिश्रा ने बुधवार को बताया कि राजभवन में व्यापक सुरक्षा जांच के बावजूद हमें वहां कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला।

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मंगलवार सुबह राजभवन और बिहार पुलिस के अधिकारियों को धमकी भरा ईमेल मिला, जिसमें दावा किया गया था कि राज्यपाल के आवास पर बम रखा गया है।

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ये पूरी तरह से अफवाह निकला क्योंकि कुछ भी नहीं मिला। एसएसपी ने कहा कि हम अब ईमेल के स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं और प्रेषक का पता लगाने के लिए ‘इंटरनेट प्रॉटोकोल’ (आईपी) पते के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

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दिल्ली, एनसीआर और गुरुग्राम के सौ से ज्यादा स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी के बाद स्कूलों में आए बच्चों को घर भेज दिया गया। स्कूल भवनों और परिसर की सघन जांच की गई।

कहीं कुछ नहीं मिला। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे फर्जी काल बताया है। एक दिन पहले कोलकाता में राजभवन को बम से उड़ाने का फर्जी ईमेल आया था।

एयरपोर्ट या अन्य सार्वजनिक स्थानों के बारे में भी ऐसे फर्जी मेल या काल अक्सर आते रहते हैं। इंटरनेट के युग में ऐसे फर्जीवाड़ों की भरमार आ गई है।

जाहिर है कि ऐसी सूचनाएं दहशत फैलाने के इरादे से ही प्रसारित की जाती हैं। प्रशासन परेशान हो, सरकार भयभीत हो और लोग आतंकित हों, मेल भेजने वालों और काल करने वालों का यही मकसद होता है।

ऐसा करने वाले यकीनन आपराधिक प्रवृत्ति के या सिरफिरे होंगे। सत्ता पक्ष के लिए जिस तरह विपक्ष बेवजह मुसीबत खड़ी करने का अभ्यस्त हो चुका है, उसमें ऐसे शरारती तत्व आसानी से अपने हाथ साफ कर लेते हैं।

ऐसी दहशतगर्दी फैलाने में पड़ोसी दुश्मन देशों का भी हाथ हो सकता है। विपक्ष की ऐसी सूचनाओं पर चुप्पी भी संदेह पैदा करती है।

लोकसभा चुनाव की जारी प्रक्रिया के बीच विपक्ष जिस तरह की अफवाहों को हवा देता रहा है, उसे देख कर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि ये अफवाहें भी विपक्षी दलों के समर्थक ही फैला रहे हों।

आरक्षण खत्म करने और संविधान बदलने की बात विपक्ष शिद्दत से कह रहा है। भाजपा का भय लोगों में पैदा करने के लिए विपक्ष की यह रणनीति हो सकती है। पर, सभी जानते हैं कि ऐसा कर पाना किसी भी

राजनीतिक पार्टी के लिए नामुमकिन है। हां, संविधान में संशोधन जरूर होते रहे हैं। संविधान में संशोधन कर ही कांग्रेस नेता और भूतपूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई थी। लोकसभा का कार्यकाल छह साल

कर दिया था। 1977 में जब इंदिरा गांधी की सरकार का पतन हुआ तो फिर संविधान संशोधन कर पुरानी स्थिति बहाल की गई। अब तक सौ से अधिक संशोधन संविधान में हो चुके हैं। संविधान का मूल ढांचा आज भी बरकरार है। यानी संविधान में संशोधन तो हो सकता है, पर इसे खत्म करने की बात चुनावी अफवाह से अधिक कुछ नहीं। ठीक उसी तरह, जैसी बम होने की अफवाह फैलाई गईं।

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