एलएनएमयू में जखन-तखन’ व्याख्यानमाला कार्यक्रम का हुआ आयोजन।
दरभंगा: शुक्रवार को प्राचीन भारतीय इतिहास पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्व विद्यालय, दरभंगा में ‘जखन-तखन’ व्याख्यानमाला का आठवां व्याख्यान ‘मिथिला में कल-कारखाना’ साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त अजित आजाद ने दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डा आमिर अली खान ने की।
मुख्य वक्ता श्री आजाद ने मिथिला में कल-कारखाना के इतिहास की व्याख्या करते हुए कहा कि- ‘वर्तमान समय में मिथिला के आकाश में जो धुआं उड़ता दिख रहा है वह ईंट भट्ठों का है, कभी चीनी मिल, जूट मिल, पेपर मिल सहित रेल गाड़ी, बरौनी रिफाईनरी, खाद कारखाना, रेल आदि के धुओं से यहाँ का आकाश अच्छादित रहता था| कभी झंझारपुर को साईकिल फैक्ट्री, पंडौल में सूत मिल का सौगात मिलने वाला था, किन्तु यह कभी अयाम में आया ही नहीं| मधेपुरा का रेल कारखाना और भागलपुर का सिल्क उद्योग स्थानीय लोगों का आस बना हुआ है| मिथिला में जहाँ उद्योगों का सृजन होना चाहिए था वहीँ सैकड़ों औद्योगिक कारखानाएं बंद होते-होते अब शून्य की स्थिति में पहुँच चूके हैं, जो सबसे दुखद है।
मिथिला के स्वावलम्बी ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए विषय प्रवेश पूर्व विभागाध्यक्ष डा अयोध्यानाथ झा, संचालन साहित्यकार बिभूति आनंद और धन्यवाद् ज्ञापन प्रतिभा किरण ने किया| इस अवसर पर प्रो भीमनाथ झा, डा मित्र नाथ झा, डा अवनींद्र कुमार झा, डा विद्यानाथ झा, डा मंजर सुलेमान, डा दमन झा, डा सुनीता, कवि आनंद मोहन झा सहित दर्जनों शोधार्थी एवं छात्र छात्राएं मौजूद रहे|
